क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : शहर की व्यवस्था सुधारने का जिम्मा रांची नगर निगम का है, लेकिन वह शहर को संभालने में हांफ रहा है. न तो शहर में सफाई हो रही है और न ही डोर-टू-डोर कचरा कलेक्ट हो रहा है. वहीं, वार्डो में स्ट्रीट लाइट की बत्ती गुल है और लोग अंधेरे में आने-जाने को मजबूर हैं. इतना ही नहीं समस्याओं को लेकर पार्षदों ने नगर निगम के अधिकारियों से गुहार भी लगाई है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि शहर को स्वच्छ रखने का दावा करने वाला रांची नगर निगम सिटी को स्मार्ट कैसे बनाएगा.

1-एजेंसी ने कम कर दी सफाई गाडि़यां

सिटी के आधे से अधिक वार्डो में एस्सेल इंफ्रा की आरएमएसडब्ल्यू कंपनी सफाई का काम कर रही है. जिसके तहत घरों से कचरा कलेक्ट किया जाता है. हर दिन सुबह गाडि़यां आती है और घरों से कचरा ले जाकर मिनी ट्रांसफर स्टेशन में जमा कर देती है. लेकिन, कलेक्शन करने वाली गाडि़यों की संख्या एजेंसी ने कम कर दी है. इस वजह से घरों से वेस्ट कलेक्शन नहीं हो पा रहा है.

2-स्ट्रीट लाइट की बत्ती गुल

गली-मोहल्ले में स्ट्रीट लाइट को हटाकर एलइडी बल्ब लगाए गए थे. लेकिन वार्डो में अधिकतर लाइट 20 दिनों से खराब पड़े है. लाइट ठीक कराने के लिए पार्षदों ने अधिकारियों से कंप्लेन भी की. इसके बावजूद लाइट ठीक नहीं कराया गया है. जिससे कि लोग अंधेरे रास्तों से गुजरने को मजबूर है. इस दौरान अगर कोई घटना हो जाए तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा.

3-फॉगिंग पर ग्रहण, मच्छरों का प्रकोप

हर वार्ड में फॉगिंग के लिए नया रोस्टर तैयार किया गया. वहीं इसके लिए गाडि़यां और दिन भी तय कर दिया गया. इसके बावजूद वार्डो में फॉगिंग नहीं होने से लोग परेशान है. मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से लोग घरों में डरकर रह रहे है. फॉगिंग करने वाली कई गाडि़यां भी स्टोर में खराब पड़ी है. डेंगू और चिकनगुनिया के लगातार बढ़ रहे मरीजों के बावजूद रांची नगर निगम के अधिकारी नींद में सो रहे है.