क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: झारखंड हाई कोर्ट ने रांची -जमशेदपुर फोरलेन का बाकी बचा निर्माण कार्य दूसरे संवेदक से कराने का एनएचएआइ को निर्देश दिया है. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस एके चौधरी की कोर्ट ने कहा कि यह जनहित का मुद्दा है, इसलिए एनएचएआइ बाकी बचे कार्य के लिए टेंडर की प्रक्रिया प्रारंभ करे. संवेदक की ओर से एग्रीमेंट रद नहीं किए जाने के आग्रह पर कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि भगवान के लिए इस प्रोजेक्ट से चिपके न रहें. एनएचएआइ की ओर से दिए जा रहे वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) प्रस्ताव को स्वीकर कर लें ताकि बाकी बचा काम आगे बढ़ सके. हालांकि कोर्ट ने संवेदक के एग्रीमेंट को समाप्त नहीं किया. कोर्ट ने सभी पक्षों को एक साथ बैठकर ओटीएस पर विचार कर एक राय बनाने का निर्देश दिया. मामले में अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी.

सड़क नहीं हो रही मरम्मत

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अब तक बनी सड़क का मरम्मती कार्य भी नहीं हो रहा है. तमाड़ सहित कई अन्य जगहों पर सड़क की हालत बहुत खराब है. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने कहा कि वह खुद इस सड़क से कई बार जमशेदपुर गए हैं. अभी हाल में ही शनिवार को जमशेदपुर गए थे और रविवार को लौटे हैं. पिछली सुनवाई में एनएचएआइ की ओर से सड़क की मरम्मती के लिए राशि भी आवंटित होने की जानकारी दी गई, लेकिन अभी तक मरम्मती का काम शुरू भी नहीं हुआ है. जल्द से जल्द मरम्मत का कार्य प्रारंभ करें.

प्लीज एग्रीमेंट रद न करें, होगा नुकसान

सुनवाई के दौरान बुधवार को संवेदक के अधिवक्ता ने कहा कि अगर एनएचएआइ उनका एग्रीमेंट रद करती है तो उन्हें बहुत नुकसान होगा. एग्रीमेंट रद होने के बाद एनएचएआइ की ओर से मिलने वाली राशि भी नहीं दी जाएगी. वहीं, संवेदक से ही बैंक अबतक के निर्माण पर खर्च की गई राशि की वसूली करेगा. संवेदक की ओर से कहा कि गया एनएचएआइ अबतक किए गए कार्य की मापी करा ले क्योंकि उनका दावा है कि लगभग 60 फीसद कार्य किया गया है. जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

अबतक 1020 करोड़ हुए खर्च

बैंक की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रांची-जमशेदपुर फोरलेन निर्माण कार्य में अब तक ब्याज सहित कुल 1020 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. हालांकि एनएचएआइ की ओर से ओटीएस के प्रस्ताव में किसी राशि का जिक्र नहीं किया है. इसलिए सभी पक्षों को एक साथ बैठक कर ओटीएस पर विचार करना चाहिए. इस कार्य में कुल तेरह बैंक राशि दे रहे हैं. जिसके साथ 27 अगस्त 2018 को ओटीएस को लेकर एक बैठक की गई. जिसमें पूरे मामले की समीक्षा की गई. अगर अबतक हुए खर्च की राशि एनएचएआइ की ओर से दी जाती है, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी.

सरकार करेगी सहयोग

महाधिवक्ता अजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि उक्त रोड के अधूरे निर्माण के चलते प्रतिदिन दुर्घटना हो रही है. सरकार भी इस स्थिति से चिंतित है. हालांकि सरकार की ओर से रांची - जमशेदपुर फोर लेन निर्माण में ¨रग रोड का हिस्सा राज्य सरकार खुद बनाना चाहती थी, लेकिन एनएचएआइ की ओर से इस प्रस्ताव को नकार दिया गया और स्वयं निर्माण की बात कही है. जिसपर कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए. अब किसी भी प्रकार का बहाना नहीं चलेगा. चाहे वह पर्यावरण क्लीयरेंस, जमीन अधिग्रहण व अन्य किसी तरह का मामला हो, इससे संबंधित सभी उपायुक्त, जमीन अधिग्रहण अधिकारी को सरकार निर्देश दे कि निर्माण कार्य में अब कोई बाधा नहीं आए.