RANCHI: सोने की आभा से सोमवार को रांची यूनिवर्सिटी का दीक्षांत मंडप सोने-सा दमक उठा. गवर्नर द्रौपदी मुर्मू के हाथों गोल्ड मेडल और डिग्री पाकर स्टूडेंट्स के चेहरे खिल गए. डिग्रियां थामे हुए हाथ और गोल्ड मेडल से सजी गर्दन आत्मविश्वास की ताकत से सफलता का आसमान चूमने के लिए बेकरार थी. स्टूडेंट्स और टीचर्स से भरा दीक्षांत मंडप इस यादगार पल का गवाह बना. दीक्षांत समारोह में पहला गोल्ड मेडल ओवर ऑल बेस्ट मास्टर डिग्री होल्डर इन जेनरल कोर्सेज (मैथमेटिक्स) अफसाना खातून को मिला, वहीं अंतिम गोल्ड मेडल एंथ्रोपोलॉजी के अरुण कुमार मुंडरी को मिला. समारोह क्ब्भ्9 विद्यार्थियों को उपाधि मिली. इनमें ब्7 विद्यार्थियों को भ्फ् गोल्ड मेडल मिले. भ्फ् में फ्7 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम रहा. वहीं 98 स्टूडेंट्स को पीएचडी की उपाधि दी गई. एमफिल की उपाधि क्क् को मिली. दीक्षांत समारोह में ख्भ्ब्88 स्टूडेंट्स की डिग्री को स्वीकृति दी गई.

क्वालिटी एजुकेशन पर रहे जोर: गवर्नर

दीक्षांत समारोह में अपने अभिभाषण में राज्यपाल सह कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि किसी भी देश या प्रदेश के विकास के लिए ख्क्वीं सदी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण शर्त है. बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समाज के सर्वागीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती. शिक्षा में उच्चतर शिक्षा समाज के देदीप्यमान नक्षत्रों की भांति होती है, जो सर्वत्र प्रदर्शित होती है. ऐसे में यूनिवर्सिटी की महत्वपूर्ण भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसलिए आज विश्वविद्यालयों को मानववाद, सहिष्णुता, बौद्धिकता और सत्य के केंद्र के रूप में स्थापित करने की जरूरत है. शिक्षा का उद्देश्य मात्र उपाधि प्राप्त करना नहीं. शिक्षा सुख प्राप्ति का भी महत्वपूर्ण साधन है.

शिक्षा आत्मविश्वास जगाती है: वीसी

दीक्षांत समारोह में आरयू के वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि शिक्षा हमारे भीतर आत्मविश्वास का अलख जगाती है. सफल व्यक्ति यह महसूस करता है कि कामयाबी के सफर में धूप बड़ी काम आई. छांव अगर होती तो सो गए होते. सफलता की पोशाक रेडीमेड नहीं मिलती. इसे बनाने के लिए मेहनत का हुनर चाहिए. समय सबसे बड़ा गुरु है यह परीक्षा लेकर हमें सिखाता है. सीढि़यां उनके लिए बनी है, जिन्हें रास्ता बनाना है लेकिन जिनकी नजर आसमान पर होती है उन्हें तो रास्ता खुद बनाना पड़ता है. ईश्वर ने हर किसी को हीरा बनाया है पर चमकता वही है जो तराशने की हद से गुजरता है.

बदलते समय के साथ रहें अपडेट: प्रो-वीसी

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रतिकुलपति डॉ कामिनी कुमार ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह है, आप कभी मन में न लायें की यह शिक्षांत समारोह है. दीक्षांत समारोह का सबसे बड़ा संदेश होता है कि यदि हमें जीवन में सफलता पानी है तो बदलते युग के साथ खुद को समकक्ष बनाए रखना है. समारोह में मंच संचालन रजिस्ट्रार डॉ अमर कुमार चौधरी ने किया.