- स्पीडी ट्रायल के तहत स्पेशल कोर्ट ने सुनाई सजा

- अदालत ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना

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RANCHI (12 Feb) : चार साल के इंतजार के बाद कांटाटोली की दिल दहला देने वाली घटना के दोषी को सोमवार को सजा-ए-मौत सुनायी गयी. 19 मार्च 2014 को एक आठ साल की मासूम बच्ची की हत्या कर शव को कांटाटोली कब्रिस्तान में फेंक दिया गया था. बच्ची के साथ कातिल ने रेप भी किया था. इस मामले में गांधी उरांव को दोषी करार दिया गया था, जिसके बाद सोमवार को अपर न्यायायुक्त (प्रथम) सह पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने स्पीडी ट्रायल करते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई.

गुमला का निवासी है हत्यारा

बच्ची का हत्यारा गांधी उरांव गुमला जिले के खोरा रवैना गांव का निवासी है. फैसले में अदालत ने कहा कि सभी मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' पाया गया. इसलिए अभियुक्त को हत्या से जुड़े भादवि की धारा 302 के तहत फांसी की सजा दी जाती है. इसके अलावा दुष्कर्म करने से संबंधित भादवि की धारा 376 के तहत उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना, प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम (पोक्सो) के तहत उम्रकैद व 10 हजार रुपये जुर्माना और साक्ष्य छुपाने से संबंधित भादवि की धारा 201 में पांच वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. जुर्माने की राशि नहीं देने पर अभियुक्त को ढाई वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी.

31 जनवरी को अदालत ने ठहराया था दोषी

अदालत ने अभियुक्त गांधी उरांव को 31 जनवरी को दोषी ठहराया था. मामले में अभियोजन की ओर से बच्ची के पिता, मां सुधा टोप्पो, पोस्टमार्टम करने वाले रिम्स के चिकित्सक डॉ. एके चौधरी, राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला के विशेषज्ञ एसके सिन्हा, लोअर बाजार के तत्कालीन थाना प्रभारी व मामले के अनुसंधान पदाधिकारी कुमार गौरव सहित 14 लोगों की गवाही न्यायालय में दर्ज की गई. मामले में डे टू डे सुनवाई चल रही थी.