भारत में बहुत सारे ऐसे स्थान हैं, जहां रहस्यमयी चमत्कार होते हैं और उन चमत्कारों के पीछे क्या राज छिपे हैं इसका कारण आज तक कोई नहीं जान पाया। ऐसा ही एक स्थान है मथुरा के वृंदावन का निधि वन। कहते हैं कि यहां प्रतिदिन रात को श्रीराधाकृष्ण गोपियों संग रास रचाने आते हैं।

ऐसे होती है श्रीकृष्ण की रासलीला

इस वन में हर रात गोपियों संग महारास रचाते हैं श्रीकृष्ण,देखने वाला हो जाता है पागल

वृन्दावन के निधि वन में लगभग 16,000 पेड़ हैं तथा यहां के पेड़ों की एक विशेषता है। यहां किसी भी पेड़ का तना सीधा नहीं होता और इन पेड़ों की डालियां नीचे की ओर झुकी हुई और आपस में गुंथी हुई होती हैं। यही 16,000 पेड़ रात्री के समय भगवान कृष्ण की 16,000 गोपिकाएं बनकर उनके साथ महारास रचाते हैं। महारास के उपरांत राधा-कृष्ण निधि वन के ही रंग महल में रात्री विश्राम करते हैं।

विशाखा कुण्ड में करते हैं जलक्रीड़ा

ठाकुर जी और महारानी जी की सेवार्थ जब प्रात: ब्रह्म मुहर्त में श्री रंग महल के पट खोले जाते हैं तो श्री जी के सेवा हेतु रखी हुई दातून गीली मिलती है तथा रंग महल का भी सामान बिखरा हुआ मिलता है। ऐसी भी मान्यता है कि सुबह के समय रंग महल स्थित ललित कुण्ड, जिसे विशाखा कुण्ड के नाम से भी जाना जाता हैं उसमें श्री राधा माधव जलक्रीड़ा भी करते हैं।

शाम को निधि वन के मुख्यद्वार पर लग जाता है ताला

इस वन में हर रात गोपियों संग महारास रचाते हैं श्रीकृष्ण,देखने वाला हो जाता है पागल

निधि वन में हर रात होने वाली श्री जी की रासलीला को देखने वाले भक्तगण पागल, अंधे, बहरे, गूंगे तथा मनोविकार से पीडि़त हो जाते हैं ताकि वह इस महारास के बारे में कुछ भी वर्णन न कर पाएं। इसी कारण संध्या आरती के बाद लगभग शाम 07:30 बजे यहां दिन के समय विचरनेवाले पुजारी, भक्तगण और यहां तक के पशु पक्षी भी यहां से चले जाते हैं तथा परिसर के मुख्यद्वार पर ताला जड़ दिया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि यहां जो भी रात्री के समय ठहर जाता है तथा जो व्यक्ति यहां महारास के दर्शन कर लेता है वह सांसारिक बंधनों से मुक्ति पा लेता है।

-ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीपति त्रिपाठी

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