लंदन (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रवि शास्त्री का कहना है कि धोनी को सात नंबर पर भेजने का फैसला टीम का था। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले सेमीफाइनल में भारत को 240 रन चेज करने थे। भारत के शुरुआती चार बल्लेबाज 24 रन पर पवेलियन लौट गए थे। बाद में धोनी (50) और रवींद्र जडेजा (77) ने सातवें विकेट के लिए 116 रन की साझेदारी कर जीत की उम्मीद जताई थी मगर ऐन वक्त धोनी के रनआउट होने से भारत लक्ष्य से 18 रन पीछे रह गया था और करारी हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया। इस मैच में माही को दिनेश कार्तिक और हार्दिक पांड्या के बाद भेजा गया था जिसको लेकर काफी सवाल खड़े हो रहे।

यह टीम का निर्णय था
धोनी को इतने नीचे भेजने को लेकर कोच रवि शास्त्री का कहना है, 'यह टीम का निर्णय था और हर कोई इसके समर्थन में था। हमें पता था अगर धोनी को आगे भेज दिया गया और अगर वे आउट हो गए, तो हमारे लिए लक्ष्य हासिल कर पाना नामुमकिन सा हो जाता।' एक अंग्रेजी अखबार से छपी खबर के मुताबिक, शास्त्री को उस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। यही नहीं रवि आगे कहते हैं, 'हमें मैच में धोनी के अनुभव की जरूरत थी, वो दुनिया के बेस्ट फिनिशर हैं। अगर हम उनका सही जगह इस्तेमाल नहीं कर सके तो यह बड़ा अपराध होगा। इस बारे में पूरी टीम जानती थी।'

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सेमीफाइनल में हारने के बाद रवि शास्त्री अब भी टीम इंडिया को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम मानते हैं। शास्त्री ने मैच के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ियों से कहा था,' आप गर्व से सिर ऊंचा करके बाहर आइए। वो 30 मिनट आपके पिछले कुछ सालों के बेहतर प्रदर्शन को मिटा नहीं सकते और यही सच्चाई है। आप लोग भी इससे वाकिफ हो। एक टूर्नामेंट या एक सीरीज से किसी की प्रतिभा का आंकलन नहीं किया जा सकता। आप लोग सालों से इज्जत कमाते आए हो। हां बिल्कुल, हार से हम सभी निराश हैं। लेकिन आखिर में हमें गर्व होना चाहिए जो हमने पिछले दो सालों में किया।'

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नंबर 4 बल्लेबाजी एक बड़ी समस्या
शास्त्री से जब टीम इंडिया के नंबर 4 पोजीशन के बल्लेबाज के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा- यह हमारे लिए चिंता का विषय है। टीम को नंबर 4 के लिए एक मजबूत बल्लेबाज की जरूरत है। यह ऐसी पोजीशन है जिससे हम सालों से परेशान हैं। हमने टीम में केएल राहुल को रखा मगर शिखर धवन के चोटिल होने से वह ओपनर बन गए। विजय शंकर को आजमाया मगर वो भी चोट के चलते बाहर हो गए। ये ऐसी स्थिति है जिसपर हमारा कोई कंट्रोल नहीं।

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