मुंबई (पीटीआई)। बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने शुक्रवार को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) और जापान की ओरिक्स कॉरपोरेशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। ये दोनों कंपनियां कर्ज के बोझ तले दबी इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंस सर्विसेज (आइएलएंडएफएस) की सबसे बड़ी शेयरधारकों में शामिल हैं। कंपनी में एलआइसी की 25.34 फीसद, जबकि ओरिक्स की 23.54 फीसद हिस्सेदारी है। सूत्रों के मुताबिक आरबीआइ के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन और एमके जैन दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिले।
 
दो सबसे बड़े शेयरधारकों से ही मुलाकात
हालांकि सूत्रों ने बातचीत का ब्यौरा देने से इन्कार कर दिया। आइएलएंडएफएस में अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी 12.56 फीसद, एचडीएफसी 9.02 फीसद, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 7.67 फीसद और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) 6.42 फीसद की हिस्सेदार हैं। आरबीआइ ने इससे पहले आइएलएंडएफएस के सभी शेयरधारकों को बुलाया था। लेकिन बाद में नियामक ने सिर्फ दो सबसे बड़े शेयरधारकों से ही मुलाकात का फैसला किया।आइएलएंडएफएस गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है।

91,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज

कंपनी पर कंसोलिडेटेड आधार पर इस वक्त 91,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। कंपनी 27 अगस्त के बाद से कई कर्ज के ब्याज भुगतान में विफल रही है। गुरुवार को ही कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया कि बीते दिनों वह कम से कम सात भुगतान में विफल रही। हालांकि शुक्रवार को एलआइसी म्यूचुअल फंड ने कहा कि आइएलएंडएफएस की शाखा ने उसके 300 करोड़ रुपये बकाये का भुगतान कर दिया है। आइएलएंडएफएस संकट के चलते घरेलू शेयर बाजारों पर भी पिछले कई सत्रों से बेहद नकारात्मक असर पड़ा है।इस बीच, आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने शुक्रवार को कहा कि सरकार आइएलएंडएफएस पर पैनी नजर रख रही है। उनके मुताबिक सरकार सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय तंत्र पर कंपनी की बिगड़ी माली हालत का कोई बुरा असर नहीं पड़े।

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