कुंभ को लेकर पहली बार स्पेनिश, फ्रेंच, ब्रिटिश, जर्मन और अमेरिकन भाषाओं में प्रकाशित होगा साहित्य

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ALLAHABAD: संगम की रेती पर लगने वाले कुंभ मेला में लाखों विदेशी आते रहे हैं जिन्हें मीडिया के जरिए ही कुंभ के बारे में जानकारियां मिल पाती है. लेकिन इस बार का कुंभ थोड़ा हटकर होने जा रहा है. कुंभ का प्रचार केवल हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में ही नहीं बल्कि विदेशी भाषाओं में भी कराया जाएगा. यही वजह है कि कुंभ के महात्म्य पर पहली बार कई भाषाओं में साहित्य प्रकाशित करने की योजना बनी है. पर्यटन विभाग की ओर से विदेशियों को कुंभ का महत्व बताने के लिए स्पेनिश, फ्रेंच, ब्रिटिश, जर्मन व अमेरिकन भाषाओं में कुंभ साहित्य छपवाया जा रहा है.

साहित्य में क्या-क्या है खास

पर्यटन विभाग के लखनऊ मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय द्वारा कुंभ साहित्य पर कार्य कराया जा रहा है. साहित्य में खासतौर से अखाड़ों के स्नान की परंपरा, अखाड़ों का महत्व व उनका इतिहास, कुंभ की शुरुआत, कुंभ कलश का महत्व, मेला का एरिया व दी जाने वाली सुविधाएं, प्रयागराज मेला प्राधिकरण क्या है और प्रयाग के महत्वपूर्ण स्थलों की विस्तृत जानकारियों को शामिल किया गया है.

इसी माह प्रकाशित होगा साहित्य

कुंभ साहित्य को पहले चरण में हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित करने की योजना है. दोनों भाषाओं में साहित्य के विषयों पर लेखन कार्य कराया जा चुका है और इस समय विभागीय स्तर पर उसकी प्रूफ रीडिंग कराई जा रही है. क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव की मानें तो अगस्त के अंतिम सप्ताह में दोनों भाषाओं में कुंभ साहित्य का प्रकाशन कराया जाएगा.

रीजनल सेंटर को भेजेंगे साहित्य

विभाग की ओर से हिन्दी व अंग्रेजी भाषा के अलावा गुजराती, असमिया, मराठी, कन्नड़, तेलगु व तमिल जैसी भाषाओं में भी साहित्य को छपवाया जाएगा. इसके साथ ही इसे संबंधित राज्यों के पर्यटन विभाग को भी प्रचार प्रसार के लिए भेजा जाएगा. इस कार्य को सितम्बर महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है.

मेला में खुलेगा सेंटर

पर्यटन विभाग द्वारा तैयार कराए जा रहे कुंभ साहित्य को देश-विदेश में तो प्रसारित किया जाएगा. इसके अलावा कुंभ मेला की अवधि में इसे वितरित करने की योजना बनाई गई है. इसके लिए परेड ग्राउंड में एक कमांड आफिस की स्थापना की जाएगी. वहां भारतीय और विदेशी भाषाओं में कुंभ साहित्य की बुकलेट देने की व्यवस्था की जाएगी. ये पूरी तरह से निशुल्क रखी जाएगी.

कुंभ का प्रचार-प्रसार केवल भारतीय भाषाओं में ही नहीं बल्कि कई विदेशी भाषाओं में किया जाएगा. इसके लिए कुंभ साहित्य नाम से बुकलेट तैयार कराई जा रही है. इसे नई दिल्ली के पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय के मुख्यालय में भेजा जाएगा.

अनुपम श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी