RANCHI: झारखंड में ह्यूमन ट्रैफि किंग एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है. हर दिन ट्रैफि किंग की शिकार महिलाओं और बच्चों को रेस्क्यू किया जा रहा है. इसके बाद भी इनके जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं आ रहा. लेकिन, अब झारखंड सरकार ट्रैफिकिंग के शिकार लोगों के लिए रिहेबिलिटेशन कम रिसोर्स सेंटर दिल्ली में बनाने जा रही है. साथ ही रांची में भी स्टेट रिसोर्स सेंटर बनाया जाएगा. जहां बच्चे, महिलाएं और लड़कियां रेस्क्यू कर लाई जाएंगी और उनके रिहेबिलिटेशन का काम होगा. झारखंड महिला बाल विकास विभाग द्वारा यह रिसोर्स सेंटर चलाया जाएगा. यहां ट्रैफिकिंग के शिकार लोगों की जिंदगी सुधारी जाएगी.

लीगल सपोर्ट भी मिलेगा

रांची और दिल्ली में जो रिसोर्स सेंटर बनाया जाएगा, उसका संचालन झारखंड सरकार करेगी. इसके लिए झारखंड सरकार रिहेबिलिटेशन सेंटर चलाने वाली बड़ी संस्थाओं के साथ संपर्क कर रही है, जो ट्रैफि किंग के शिकार लोगों का जीवन सुधारने का काम कर रहे हैं. रिसोर्स सेंटर में महिलाओं, बच्चों और लड़कियों के जीवन सुधार पर काम किया जाएगा. उनके साथ किसी तरह की अगर ज्यादती हुई हो तो उसको लीगल मदद भी रिसोर्स सेंटर द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा.

हेल्पलाइन नंबर चालू रहेगा

झारखंड सरकार द्वारा मिसिंग चाइल्ड के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है. उसका संचालन रिसोर्स सेंटर द्वारा ही किया जाएगा. वहीं, जो भी संस्था रिसोर्स सेंटर का संचालन करेगी उसे समाज कल्याण विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर काम करना होगा. यहां मिसिंग चिल्ड्रेन, बच्चियों और महिलाओं की शिकायत की जाती है, इसका संचालन लगातार किया जाता रहेगा. सरकार द्वारा जो नंबर जारी किया गया है उसका संचालन रिसोर्स सेंटर करेगा.

परिवार से मिलाएगा सेंटर

रिसोर्स सेंटर द्वारा मानसिक और शारीरिक शोषण के शिकार बच्चों के सुधार का काम भी किया जाएगा. इस रिसोर्स सेंटर में रेस्क्यू कर लाए गए महिलाओं और बच्चों की मदद की जाएगी. साथ ही जो ट्रैफि किंग और मिसिंग लोग हैं, उनको उनकी फैमिली से मिलाने का काम भी रिसोर्स सेंटर द्वारा किया जाएगा.

18 सालों में 42 हजार बच्चे गए बाहर

रोजगार की तलाश में झारखंड के लड़के-लड़कियां हर वर्ष महानगरों का रुख करते हैं. दलाल उन्हें और उनके परिवारों को बेहतर जिंदगी का सब्जबाग दिखाते हैं. इसमें ये मासूम फंस जाते हैं. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से लगभग 42 हजार बच्चे असुरक्षित रूप से बाहर ले जाए गए हैं. बावजूद इसके राज्य सरकार आज तक इनके लिए पुनर्वास केंद्र नहीं बनाई.

दिल्ली में कई प्लेसमेंट एजेंसी

दिल्ली में एक हजार से ऊपर ऐसी प्लेसमेंट एजेंसियां हैं, जो अवैध तरीके से काम रही हैं. झारखंड में दलाल व्यक्तिगत तौर पर संपर्क करते हैं. अक्सर 14-18 वर्ष की लड़कियां को जाल में फं साया जाता है. इसके लिए उन्हीं की उम्र की लड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो खुद ट्रैफि किंग पीडि़त होती हैं. ये असुरक्षित रूप से पलायन करती हैं. नतीजतन हर वर्ष राज्य की 10-12 परसेंट बेटियां गुमशुदा पाई जाती हैं. पुलिस के पास इनकी कोई ट्रैकिंग नहीं है.

67 परसेंट होती हैं एसटी लड़कियां

ट्रैफि किंग का शिकार होनेवालों में लगभग 70 परसेंट लड़कियां होती हैं. इनमें 67 प्रतिशत जनजातीय समुदाय की हैं, 9 प्रतिशत ओबीसी और लगभग 4 प्रतिशत अनुसूचित जाति की होती हैं. जबकि, लगभग 10 प्रतिशत लड़के हर वर्ष असुरक्षित पलायन करते हैं. ट्रैफि किंग से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में चाईबासा, गुमला, खूंटी, साहिबगंज, लोहरदगा, लातेहार, पाकुड़, दुमका, रांची, सिमडेगा, गिरिडीह आदि हैं.