मेरठ-बुलंदशहर हाइवे के चौड़ीकरण में आ रहा मदरसा

एनएच-58 पर दो धार्मिक स्थलों को हटाने पर बनी सहमति

Meerut. रफ्तार में रोड़ा बन रहे धार्मिक स्थलों की शिफ्टिंग के लिए जिला प्रशासन ने एक बार फिर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के पेंच कसे हैं. मेरठ जैसे संवेदनशील शहर में धार्मिक स्थलों को सड़क से हटाना चुनौती है तो वहीं प्रशासन का मानना है कि धर्मगुरुओं के साथ हुए सुलह समझौते कारगर साबित हो इसके लिए कार्य में तेजी आवश्यक है. हाइवे की राह में आ रहे धर्मस्थलों को मुआवजा देकर हटाने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश के बाद एनएचएआई ने जिला प्रशासन के साथ ज्वाइंट सर्वे आरंभ कर दिया है.

टल रही कार्यवाही

प्रशासनिक अधिकारियों की मध्यस्थता में कई स्तर की वार्ता के बाद गत दिनों मेरठ-बुलंदशहर हाइवे के चौड़ीकरण की राह में आ रहे मदरसे, कब्रिस्तान और मस्जिद को हटाने पर सहमति धर्मगुरुओं के साथ सहमति बन गई है. अल्लीपुर जिजमाना में स्थित मदरसा परिसर का 40 मीटर हिस्सा चौड़ीकरण की राह में आ रहा है. इसके अलावा एनएच-58 पर खडौली के समीप एक मस्जिद और एक बौद्ध स्तूप भी रफ्तार के आड़े आ रहे हैं. एडीएम सिटी मुकेश चंद्र की अगुवाई में धर्मगुरुओं और धर्मस्थल संचालकों से बातचीत कर सहमति बनी थी. एनएचएआई की ओर से मुआवजा देने में हीलाहवाली से संवेदनशील मुद्दे पर कार्यवाही टल रही है.

एनएचएआई के कसे पेंच

डीएम अनिल ढींगरा के निर्देश के एमडीएम एलए कार्यालय ने एनएचएआई को लिखे पत्र में एनएच-58 पर स्थित धार्मिक स्थलों को हटाने निर्देश दिए हैं. गौरतलब है धर्मगुरुओं ही सहमति से मुआवजा बांटने का काम एनएचएआई का है तो वहीं पुलिस-प्रशासन के साथ तालमेल बैठाकर धार्मिक स्थल को हटाने की तिथि भी अथॉरिटी को तय करनी है.

जिला प्रशासन के साथ बैठक में धर्मगुरुओं और मदरसा संचालक ने धार्मिक स्थल हटाने पर सहमति जताई है. एनएचएआई को जल्द से जल्द प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं.

ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, एडीएम भूमि अध्याप्ति

अप्रैल प्रथम सप्ताह में ही धार्मिक स्थलों को हाइवे से हटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा. धर्मगुरुओं और मदरसा संचालन से सहमति बनी है कि वे स्वयं भी नापजोख में आ रहे निर्माण को हटा लेंगे.

दिनेश चंद्र चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई