- किसानों से रूठे इंद्र देवता, सामान्य से कम हुई बारिश

- उत्पादन में 40 प्रतिशत कमी आने की आशंका

GORAKHPUR : अगले कुछ महीनों में आपकी थाली से चावल गायब हो सकते हैं. बारिश न होने से धान की खड़ी फसल सूख गई है. जून से लेकर सितंबर तक इंद्रदेव की बेरुखी ने किसानों के माथे पर शिकन ला दी है. तराई के इलाकों में धान की पैदावार अच्छी होती है. गोरखपुर भी तराई क्षेत्र में आता है, इसके बावजूद इस साल सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण धान की फसल बर्बाद हो रही है. कई मायूस किसानों ने धान की खड़ी फसल को जोत दिया है ताकि बचे वक्त में कुछ और बो कर आजीविका चलाई जा सके.

40 प्रतिशत खेतों में सूखा

जिला कृषि विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में 1 लाख 57 हजार 740 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है. बड़हलगंज, बांसगांव, कैंपियरगंज और पिपराइच एरिया में धान की खेती बहुतायत में होती है. जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि इस साल सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इसका सीधा असर धान के उत्पादन पर पड़ा है. जिले में तीन दिन पहले के रिकार्ड के अनुसार 60 हजार हेक्टेयर फसल सूख गई है. अगर दशहरा तक बारिश नहीं हुई तो आशंका है कि 1 लाख हेक्टेयर फसल बरबाद हो जाएगी.

5 हजार एकड़ का हुआ है नुकसान

बारिश न होने से जिले के किसानों की कमर टूटने लगी है. जिंदापुर के किसान रामविलास गुप्ता का कहना है कि एक किसान को प्रति एकड़ 5 हजार रुपए के लगभग नुकसान हुआ है. जून माह में जब धान के पौधे रोपे गए तो उम्मीद थी कि बारिश होगी. बारिश नहीं हुई तो ट्यूबवेल और पंपिग सेट की मदद से रोपाई कर दी गई, लेकिन सिर्फ उससे धान की फसल तैयार नहीं होती. ऊपर से एक बार सिंचाई करने में ठीकठाक खर्च आता है. ऐसे में बारिश न होने से किसानों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है.

दो साल पहले बना था रिकार्ड

गोरखपुर धान के उत्पादन के लिए जाना जाता है. जिला कृषि विभाग के अनुसार जिले में कुल 34 प्रकार के चावल उगाए जाते हैं. दो साल पहले धान के उत्पादन में गोरखपुर ने नई उंचाईयों पर पहुंचा था. प्रति हेक्टेयर 24.03 कुंतल पैदावार गोरखपुर में हुई थी. पूरे जिले से 362.28 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ था. पिछले साल बारिश न होने के कारण धान के उत्पादन में 20 प्रतिशत कमी आ गई. इस साल जिस तरह बारिश हुई है, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि 200 लाख मीट्रिक टन उत्पादन भी नहीं हो पाएगा. ऐसे में चावल की कीमतों में आग लगना तय है.

लगेगी महंगाई की आग

चावल छह माह पहले वर्तमान मूल्य छह माह बाद संभावित मूल्य

सोनम 2500 3000 3500

सांभा 2300 2800 3200

बौनिया 1600 2000 2300

काला नमक 5000 6000 7500

जून-जुलाई माह में बारिश कम होने के कारण खेतों में धान के पौधों को पर्याप्त नमी नहीं मिली. जिसके कारण फसल सूख गई है. ट्यूबवेल से पानी लगाया गया, लेकिन वो नाकाफी साबित हुआ है.

विजय प्रताप यादव, किसान, चिउटीराम

बारिश न होने के कारण किसानाें की स्थिति बहुत खराब हो गई है. खेतों में खड़ी सफल सूख गए हैं. पहले भगवान इंद्र ने धोखा दिया और उसके बाद बिजली विभाग ने किसानों की कमर तोड़ दी.

किरन पांडेय, ग्रामीण गृहणी, आशा कौडि़या

बारिश न होने का प्रभाव बाजार पर जरूर पड़ेगा. जिस तरह से बारिश न होने के कारण धान की फसल सूख रही है, उससे चावल मार्केट में 20 प्रतिशत उछाल आने की उम्मीद दिख रही है.

जोखू गोलेदार, व्यापारी, साहबगंज मंडी

बारिश न होने के कारण धान की लगभग 60 प्रतिशत फसल सूखे की चपेट में आ गई है. इसका सीधा असर गोरखपुर के चावल उत्पादन पर पड़ेगा.

अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी