- शहर में लगातार घट रही है साइकिल रिक्शों की संख्या

-ई-रिक्शा के आगे फेल फेल हुआ पैडल रिक्शा

जमाना कितना ही क्यों न बदल गया हो, लेकिन कोलकाता की सड़कों पर आज भी हाथ रिक्शा चलाने वालों की संख्या कम नहीं हुई है. लेकिन स्मार्ट सिटी बनारस में साइकिल रिक्शों की संख्या साल दर साल घटती जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह घटती कमाई और बढ़ती ई-रिक्शों की संख्या है. किसी जमाने में शहर की सड़क पर दौड़ते पैडल रिक्शों की संख्या बहुत ज्यादा थी. लेकिन आज ई-रिक्शों के दखल की वजह से पैडल रिक्शे चलन से बाहर हो रहे हैं. अब न कोई इन रिक्शों को खरीद रहा है और न पुराने रिक्शों का रिन्यूअल कराया जा रहा.

तीन साल में एक भी रजिस्ट्रेशन नहीं

शहर में चलने वाले पैडल रिक्शा चालकों के रिक्शों का रजिस्ट्रेशन नगर निगम में होता है, लेकिन निगम में पिछले तीन साल में एक भी नए रिक्शे का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ. पुराने रिक्शों में भी हर साल हजारों रजिस्ट्रेशन घट रहे हैं. निगम कर्मचारियों का कहना है कि निगम में रजिस्टर्ड साइकिल रिक्शों की संख्या में हर साल डेढ़ से दो हजार की कमी हो रही है. उनका कहना है कि इन रिक्शों की संख्या अगर ऐसे ही घटती रही तो बहुत जल्द ही इनका अंत हो जाएगा.

100 रुपये कमाना भी मुश्किल

जानकारों का कहना हैं कि पैडल रिक्शों के कम होने की वजह कमाई का कम होना है. पहले जहां ये रिक्शा चालक रोजाना दो से तीन सौ रूपए कमा लेते थे, वहीं आज इनके लिए 100 रूपए कमाना भी मुश्किल हो गया है. बढ़ती महंगाई की वजह से इनके किराए तो बढ़ गए, लेकिन सवारियों की संख्या कम होती जा रही है. हर कोई ई-रिक्शा पर सवार हो रहा है. इसमें सवारियों को भले ही शेयरिंग करना पड़ता है, लेकिन किराया साइकिल रिक्शे से आधा देना होता है. रथयात्रा से गोदौलिया के लिए जहां साइकिल रिक्शे का भाड़ा 20 से 25 रूपए देना होता है, वहीं ई-रिक्शा का भाड़ा 10 रूपए देना होता है.

हर कोई अफोर्ड नहीं कर सकता

ई-रिक्शे का कॉस्ट साइकिल रिक्शे के कास्ट से बेहद ज्यादा है. इसकी कीमत 80 हजार से एक लाख रूपए के करीब है. जिसकी कीमत गरीब व्यक्ति अफोर्ड नहीं कर सकता. चालकों का कहना है कि अगर किसी के पास पैसे नहीं होते थे तो वह इसे किराए पर लेकर चलाता था, लेकिन ई-रिक्शा के साथ ऐसा नहीं है. ये खुद ही फाइनेंस कराना पड़ता है. अगर किसी के पास 20 से 25 हजार नहीं है तो उसे ई-रिक्शा नहीं मिल सकता. पैडल रिक्शा से कमाई न होने से अब रिक्शा चालक मजदूरी कर रहे हैं.

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फैक्ट फाइल

तीन साल के रजिस्ट्रेशन का रिन्यूअल नगर निगम में

साल रिक्शे की संख्या

2016-17 5172

2017-18 4024

2018-19 4115

5000

नए ई-रिक्शे का रजिस्ट्रेशन आरटीओ में तीन साल में

तीन साल में ट्रॉली का रिन्यूअल

2016-17 7668

2017-18 5822

2018-19 4400

ई-रिक्शा की वजह से साइकिल रिक्शे की संख्या कम हो रही है. महंगाई के साथ इसका किराया भी बढ़ा है, जिसे सवारियां देना नहीं चाहती. अगर ऐसे ही ई रिक्शों की संख्या बढ़ेंगी तो इसका अंत हो जाएगा.

गणेश दत्ता, संरक्षक, रिक्शा परिचालन विभाग, नगर निगम