i reality check

-रक्षाबंधन पर नि:शुल्क बस यात्रा का किया गया था दावा

-सिविल लाइंस डिपो में दिनभर बसों का रहा टोटा

134 बसें अतिरिक्त चलाने का किया गया था दावा

200-250 बसें रोज चलती हैं डिफरेंट रूट्स पर

30 एसी-जनरथ बसें चलती हैं अलग-अलग रूट्स पर

dhruva.shankar@inext.co.in

ALLAHABAD: प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन पर रोडवेज की सभी प्रकार की बसों में महिलाओं के लिए नि:शुल्क यात्रा की व्यवस्था की थी. लेकिन नि:शुल्क यात्रा की सुविधा के नाम पर महिलाओं ने अपने आपको ठगा हुआ महसूस किया. सिविल लाइंस बस डिपो में दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने पड़ताल की तो नजारा कुछ और ही दिखा. डिपो परिसर में एक छोर से दूसरे छोर तक बहनें अपने गंतव्य पर जाने के लिए बसों का इंतजार करती दिखीं.

पूर्वाचल के लिए दस बजे के बाद सन्नाटा

नि:शुल्क बस यात्रा की सुविधा 25 तारीख की मध्य रात्रि से लेकर रविवार को रात बारह बजे तक के लिए दी गई थी. सिविल लाइंस डिपो से पूर्वाचल की ओर जाने वाली बसें भोर में छह बजे से चलना शुरू हुई. लेकिन दस बजते-बजते डिपो के मेन गेट के सामने परिसर में जौनपुर, आजमगढ़ और गोरखपुर की ओर की बसें नहीं दिखाई दी. अलबत्ता महिलाएं अपने परिजनों के साथ परिसर में इधर से उधर भटकती रहीं. सभी एक-दूसरे से बस की टाइमिंग पूछ रहे थे. पूछताछ काउंटर पर बैठा कर्मचारी भी महिलाओं को बस की टाइमिंग नहीं बता पा रहा था.

तीन घंटे तक हर कोई परेशान

डिपो परिसर में पूर्वाचल हो या प्रतापगढ़ और लखनऊ का रूट हो. या फिर कौशांबी होते हुए फतेहपुर और कानपुर की ओर अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए पहुंची महिलाओं को घंटों बस का इंतजार करना पड़ा. सुबह दस बजे लेकर दोपहर एक बजे तक निर्माणाधीन परिसर के सामने और मेन गेट पर इक्का-दुक्का बसें ही पहुंची. इसमें बैठने को लेकर कई बार स्थिति बिगड़ती हुई नजर आई. इतना ही नहीं रेलवे कॉलोनी सिविल लाइंस, दारागंज और कटरा एरिया से जितनी भी महिलाएं पहुंची थी उन्हें बस का इंतजार करते हुए निराश होना पड़ा और सभी दूसरे साधनों से अपने गंतव्य की ओर रवाना हुई.

अतिरिक्त बसों का दावा फेल

रक्षाबंधन के लिए दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, फैजाबाद, वाराणसी, जौनपुर व बांदा रूट पर रोडवेज प्रशासन की ओर से 134 अतिरिक्त बसें को चलाने का निर्णय लिया था. लेकिन यह दावा ऐन वक्त पर फेल होता हुआ दिखाई दिया. स्थिति यह रही कि साधारण बस के साथ ही एसी जनरथ बसों का भी दीदार डिपो परिसर में दोपहर तीन बजे तक नहीं हुआ.

कॉलिंग

सरकार की योजना बहुत अच्छी थी लेकिन इसका फायदा नहीं मिला. इसके लिए रोडवेज प्रशासन को पहले से ही प्लान बनाकर बसों का संचालन कराना था.

-हेमलता, सिविल लाइंस

तीन घंटे तक प्रतापगढ़ जाने के लिए बस का इंतजार करना पड़ा. प्रतापगढ़ के लिए एक भी बस नहीं मिली. आखिरी में मजबूर होकर रिजर्व गाड़ी करनी पड़ी.

-सरस्वती पांडेय, दारागंज

सुविधा के नाम पर हर चीज का ठिठोरा पीटा जाता है. जब रोडवेज में बसें नहीं थी तो नि:शुल्क सुविधा किस बात की दी गई थी.

शशिकला, कटरा

आज दो बार प्रतापगढ़ जाने के लिए घर से डिपो आना पड़ा. दोनों बार एक-एक घंटे तक बस का इंतजार किया लेकिन प्राइवेट साधन से भाई के घर जाना पड़ रहा है.

कविता, रेलवे कालोनी

नि:शुल्क यात्रा के लिए शनिवार की देर रात से ही डिपो में भीड़ बढ़ गई थी. बसों को आने-जाने में घंटों समय लगता है. हो सकता है कि इस वजह से महिलाओं को परेशानी हुई हो.

-डॉ. हरीशचंद्र यादव, आरएम उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम इलाहाबाद परिक्षेत्र