-शहर में बिकने वाले मिनरल आरओ वाटर की शुद्धता की नहीं कोई गारंटी

-शहर में दर्जनों अवैध आरओ वाटर प्लांट हो रहे संचालित

भीषण गर्मी में बनारस में आरओ वाटर के नाम पर करोड़ों का करोबार हो रहा है। दुकानों, ऑफिसेस और घरों में सप्लाई होने वाले इस पानी को लोग सेहतमंद समझकर पी रहे हैं, लेकिन शायद उन्हें पता नहीं कि आरओ वाटर के नाम पर सिर्फ नल का पानी ही ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। कैन में पानी बेचने वालों में से 50 परसेंट के पास आरओ प्लांट है ही नहीं। इनके पानी की कोई जांच भी नहीं होती है।

नहीं चेक होता टीडीएस

खाद्य सुरक्षा विभाग में शहर के सिर्फ 06 आरओ प्लांट ही रजिस्टर्ड हैं और यही लोग पैकेज्ड वाटर बेचने का अधिकार रखते हैं, लेकिन इन दिनों यहां दर्जनों ऐसे प्लांट बन चुके हैं जो पानी बेंचकर लाखों कमा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक शहर में यह कारोबार 90 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वाटर कैन का यूज करने वालों की संख्या एक लाख है। यही नहीं सप्लाई किए जा रहे पानी में टीडीएस की मात्रा कितनी है यह भी चेक नहीं किया जाता है। पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक होने से यह हेल्थ के लिए काफी खतरनाक हो जाता है।

खुद से ही तय किया रेट

जानकारों की मानें तो पानी के धंधे की आड़ में काले कारोबारी वाटर कैन की बिक्री के रेट भी खुद से ही तय कर लेते हैं। कंपनियों में रेट अलग और घरों में अलग रेट पर पानी सप्लाई किया जा रहा है। एक वाटर कैन में 20 लीटर तक पानी आता है और यह 25 से 40 रुपए तक मार्केट में बेचा जा रहा है। वहीं कुछ लोग छोटे-छोटे दुकानदारों तक 30 रुपये में 15 लीटर के वाटर कूलर में पानी की सप्लाई कर रहे हैं। इसमें शायद ही किसी वाटर कैन के पानी का स्वाद आरओ वाटर जैसा हो।

हार्मफुल है टीडीएस की ज्यादा मात्रा

सप्लाई किए जा रहे पानी में टीडीएस की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। जो शरीर के लिए काफी हार्मफुल है। पानी के प्योरिफिकेशन के दौरान कार्बनिक और अकार्बनिक तत्व शरीर की जरूरत के मुताबिक कम दिए जाते हैं। पानी में मैग्निशियम, कैल्शियम, पोटेशियम की एक निश्चित मात्रा स्वास्थ्य के लिए जरूरी होती है। इसकी जांच टीडीएस (टोटल डिसॉल्वड सॉलिड्स) के जरिए की जाती है। वाटर कैन में सप्लाई किए जाने वाली पानी के सप्लाई में टीडीएस की मात्रा 300 पीपीएम तक होती है, जो शरीर के लिए खतरनाक है।

मिनरल के नाम पर मोटा मुनाफा

भीषण गर्मी सरकारी नलों में पानी नदारत होने से लोग बोतल बंद पानी पीकर प्यास बुझा रहे हैं। इससे शहर में मिनरल वाटर की खपत बढ़ गई है। इसे भुनाने के लिए धंधेबाज संचालित अवैध प्लांट के व्यापारी ब्रांड के नाम पर डुप्लिकेट पानी की सप्लाई कर रहे हैं। रेलवे स्टेशन और बस अड्डा समेत शहर में कई ऐसे व्यस्ततम इलाके हैं जहां बड़े पैमाने पर ब्रांडेड मिनरल वाटर से मिलते-जुलते नाम की पानी की बोतलें महंगे दाम में बिक रही हैं। इससे दुकानदार से लेकर प्लांट संचालक तक मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

मजबूरी का बहाना

फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट के

अधिकारियों का कहना हैं कि यह सही है कि शहर में अवैध रूप से वाटर कैन में पानी सप्लाई किया जा रहा है। जिसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन ऐसे लोगों के लिए कोई नियम या रेगुलेशन नहीं है। इसलिए फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट इनकी निगरानी नहीं कर सकता। ( एफएसएसएआई) फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया का कंट्रोल भी सिर्फ पैक्ड चीजों पर ही नजर रखता है। कैन वाटर से अगर कोई संक्रमण फैलता है तो इसमे सरकार भी कुछ नहीं कर सकती।

ये है मानक

50-150 पीपीएम-सबसे अच्छा पानी

150-200पीपीएम--- अच्छा

200-300 पीपीएम--स्वच्छ

300-500 पीपीएम-- खराब व नुकसानदायक

ये है जरूरी

-पैक्ड मिनरल वाटर प्लांट के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड का लाइसेंस जरूरी।

-फूड एंड सेफ्टी एक्ट के तहत किसी मिनरल वाटर प्लांट को संचालित करने के लिए भूगर्भ जल संचय विभाग से एनओसी लेना जरूरी

-प्लांट लगाने से पहले वाटर हारवेस्टिंग की व्यवस्था जरूरी है

-कामर्शियल एरिया में होना चाहिए प्लांट

एक नजर

12

से ज्यादा ब्रांड के मिनरल वाटर बिक रहे शहर में

100

से ज्यादा मिनरल वाटर के अवैध प्लांट हो रहे हैं संचालित

06

प्लांट का ही फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट में है रजिस्ट्रेशन

50

से ज्यादा है आरओ प्लांट शहर में

90

करोड़ प्रति महीने से ज्यादा का है कारोबार आरओ वाटर कैन का

01

लाख से ज्यादा वाटर कैन की सप्लाई है रोज

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शरीर के लिए मरकरी, फ्लोराइड, क्लोरीन के साथ-साथ मैग्निशियम, कैल्शियम और सोडियम जैसे तत्व पानी में जरूरी होते हैं। इसलिए टीडीएस की जांच जरूरी होती है। इससे पानी की शुद्धता का पता चलता है।

-डॉ। एके सिंह, फीजिशियन

रजिस्टर्ड पैक्ड मिनरल वाटर की समय-समय पर जांच की जाती है। रही बात आरओ प्लांट की तो यहां 20 लीटर कैन वाटर की पैकिंग नहीं होती। इन पर कोई रेगुलेशन न होने से हम कार्रवाई और जांच नहीं कर सकते।

-संजय सिंह, डीओ फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट