- संस्कृत यूनिवर्सिटी के मैदान में आज से लगेगी संघ प्रमुख की पाठशाला

-राष्ट्रभक्ति का मंत्र देने के साथ ही करेंगे संगठन को मजबूत करने का आह्वान

varanasi.

डॉ. संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में रविवार को दोपहर बाद से आरएसएस की पाठशाला लगेगी. संघ प्रमुख मोहन भागवत 21 हजार स्वयंसेवकों में राष्ट्रभक्ति का मंत्र फूंकेंगे. साथ ही पूर्वाचल में संगठन की मजबूती के लिए भी सदस्यों का आह्वान करेंगे. कार्यक्रम को लेकर शनिवार को तैयारियां जोरशोर से जारी रहीं.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

यूनिवर्सिटी के मैदान में संघ प्रमुख के अभिभाषण के लिए भव्य मंच और पंडाल बनाया गया है. आसपास सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं. शनिवार को मंच सज्जा के अंतिम दौर के काम के दौरान ही सुरक्षाबलों ने पंडाल को निगरानी में ले लिया. गहन जांच के बाद देर शाम कार्यक्रम स्थल को सील कर दिया गया. डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते ने भी दिन में पूरे मैदान की कई चक्रों में तलाशी ली. रविवार के कार्यक्रम के लिए यातायात और सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं.

गांवों से है भारत की पहचान

- 49 जिलों के प्रचारकों के साथ संघ प्रमुख ने की बैठक

- हर हाल में धर्मातरण और गोवध रोकने का संकल्प

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को पं. दीनदयाल हस्तकला संकुल में 49 जिलों के संघ प्रचारकों की बैठक ली, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की पहचान गांवों से है. अपनी संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए हमें गांवों की रक्षा करनी होगी.

बड़ों का आदर पहला कर्तव्य

संगठन की मजबूती के साथ ही दलित और मुस्लिम महिलाओं के बीच पैठ बनाने की संघ की रणनीति मिशन-2019 की तैयारियों की तरफ भी इशारा कर रही है. संकुल भवन में प्रचारकों की बैठक में संघ प्रमुख ने धर्मातरण रोकने के साथ ही गोरक्षा पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि गोमाता के संरक्षण और संवर्धन से देशवासी शारीरिक ही नहीं, आर्थिक रूप से भी मजबूत होंगे. उन्होंने हर घर में गाय पालने पर जोर दिया. चिकित्सकीय कामों के साथ जैविक खेती में भी इसके फायदे गिनाए. बैठक के दौरान संघ प्रमुख ने कुटुंब प्रबोधन गतिविधि पर भी चर्चा की. कहा कि परिवार में माता-पिता और बड़ों का आदर, पारिवारिक संवादों में संवेदना और धर्म के प्रति जागरण एक स्वयंसेवक का पहला कर्तव्य है. उन्होंने सभी प्रचारकों को गांव-गांव जाकर धर्म और संस्कारों की अलख जगाने के निर्देश दिए.

हर कदम अनुशासन देख रहा संकुल

-स्वयंसेवक दिखा रहे मैनेजमेंट के दांव-पेंच

- दिन में पांच बार सफाई कर रहे स्वयंसेवक, अन्य जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रहे

पं. दीनदयाल हस्तकला संकुल के बाहर भारी फोर्स नजर आएगी. मेनगेट पर प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड भी मौजूद हैं. मगर गेट से भीतर घुसते ही माहौल कुछ अलग सा दिखने लगता है. तीन दिन से संघ प्रमुख की मौजूदगी में स्वयंसेवकों से गुलजार परिसर की हवा में भी अनुशासन गमक रहा है. गेट पर आगंतुक पास देने वाले से लेकर भीतर साफ-सफाई करने वाले तक किसी एजेंसी के नहीं बल्कि संघ के ही स्वयंसेवक हैं.

पूछताछ के बाद भी एंट्री

परिसर में पहुंचने वाले किसी भी नए व्यक्ति से लंबी पूछताछ की जा रही है. मुतमइन होने के बाद उन्हे 'प्रवेशार्थी पास' देकर गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक वॉलेंटियर भेजा जा रहा है. साफ-सफाई की व्यवस्था में लगे स्वयंसेवक दिन में पांच बार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं. भोजन बनाने का काम यूं तो रसोइये का है मगर उनके साथ भी भंडारी की भूमिका में स्वयंसेवक ही मौजूद हैं. बातचीत में भी संगठन का अनुशासन साफ दिखता है. भीतर के कार्यक्रमों, व्यवस्था या पदाधिकारियों की उपस्थिति को लेकर संघ के पदाधिकारी भी बोलने को तैयार नहीं. इस काम का जिम्मा प्रवक्ता को सुपुर्द किया गया है.

भोजन में कढ़ी-चावल

सात दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में स्वयंसेवकों के लिए शनिवार की दोपहर कढ़ी-चावल और दो तरह की सब्जी बनाई गई. संघ प्रमुख ने भी यही भोजन किया. प्याज-लहसुन युक्त और इनसे मुक्त दोनों प्रकार का भोजन परोसा गया था. कढ़ी पसंद नहीं करने वालों के लिए दाल भी पकाई गई थी. खास यह कि मुख्य हॉल में सभी ने एक साथ भोजन ग्रहण किया.