10 प्राइवेट वार्ड सालों से धूल फांक रहे

1500 से 2 हजार मरीज रोजाना आते हैं जिला अस्पताल में

नया आईसीयू भी नहीं हुआ शुरु, मरीज हो रहे बेहाल

Meerut. सुरक्षा व्यवस्था का अभाव व विभागीय अनदेखी से जिला अस्पताल में कई वार्ड खंडहर बनने की कगार पर हैं. हालत यह है कि करोड़ों की लागत से अस्पताल प्रशासन कई बार इनका रिनोवेशन करा चुका है. बावजूद इसके इन वार्डो का प्रयोग नहीं हो रहा है. कई सालों से यहां ताले लटके हैं. जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. पीके बंसल ने बताया कि हमारे पास मैन पावर की कमी है. सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता नहीं हैं. इसके चलते इन वार्डो को शुरु नहीं किया जा सका है. एक-दो बार संदिग्ध गतिविधियां होने के बाद इन्हें बंद कर दिया गया था. शासन से स्टाफ और सुरक्षा की मांग की है. अगर वह मिल गई तो इन वार्डो को दोबारा शुरु कर दिया जाएगा.

10 प्राइवेट वार्ड बंद

गौरतलब है कि मरीजों के लिए बनाए गए 10 प्राइवेट वार्ड फ‌र्स्ट क्लास होने के बाद भी सालों से धूल फांक रहे हैं. टाइल्स, पंखे, बिजली व पानी की यहां पूरी व्यवस्था है, लेकिन करीब 10 सालों से इन वार्डो को शुरु नहीं किया जा सका है. इनमें पांच वार्ड ब्लड बैंक के पास जबकि 5 वार्ड डीएमओ बिल्डिंग के पीछे बने हैं. साफ-सफाई व इस्तेमाल न होने की वजह से इन वार्डो की हालत खराब होने लगी है. वहीं कुछ वार्डो में अस्पताल का कबाड़ भर दिया गया है.

रैन बसेरा बना स्टोर रूम

साल 1956 में रोटरी क्लब मेरठ के तत्वावधान में तैयार किया गया, रैन बसेरा मरीज और तीमारदारों के लिए पूरी तरह से बेकार हो चुका है. इसका उपयोग अस्पताल का कबाड़ रखने के लिए स्टोर रूम की तरह किया जा रहा है. ठीक तरह से रखरखाव न होने की वजह से रैन बसेरा की बिल्डिंग पूरी तरह से खराब हो चुकी है. गेट गल चुके हैं.

स्वतंत्रता सेनानी वार्ड का निकला दम

जिला अस्पताल के पीछे बनी बिल्डिंग में बना स्वतंत्रता सेनानी वार्ड का दम निकल गया है. यह वार्ड 2009 में तैयार हुआ था तब से ही इस पर ताला लटका हुआ है जबकि कई सालों से बंद होने की वजह से इसकी हालत खराब होने लगी है.

नहीं शुरु हुआ आईसीयू वार्ड

लाखों रूपये खर्च तैयार किया आधुनिक तकनीकों से युक्त नया आईसीयू वार्ड कई महीनों से बंद पड़ा हुआ है. तैयार होने के बाद भी इस वार्ड को मरीजों के लिए नहीं खोला गया है. बंद होने की स्थिति यह वार्ड भी धूल फांक रहा है.

मरीज रहते हैं परेशान

जिला अस्पताल में रोजाना करीब 1500 से दो हजार मरीज रोजाना आते हैं. बीमारियों के सीजन में दो मरीजों को एक बेड पर भी शिफ्ट करना पड़ जाता हैं. जबकि मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों इधर-उधर भटकते रहते हैं. ऐसे में अगर इन वार्डो को मरीजों के लिए शुरु किया जाएं तो हालात काफी बेहतर हो सकते हैं.