कुंभ कलश और रोप वे के बाद पर्यटन विभाग का एक और ड्रीम प्रोजेक्ट अधर में लटका

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ALLAHABAD: इस वर्ष आयोजित माघ मेला के दौरान ही अगले वर्ष होने वाले कुंभ मेला के लिए पर्यटन विभाग की ओर से कलश के आकार की तीन मंजिला बिल्डिंग, रोप-वे व स्थाई रूप से हेलीपैड बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था. पीपीपी मॉडल के आधार पर रोप-वे का सपना मूर्त रूप नहीं ले सका और भारी भरकम बजट के फेर में कुंभ कलश बिल्डिंग तैयार नहीं हो सकी. पांच करोड़ की लागत से त्रिवेणी दर्शन के बगल में बनाए जाने वाले हेलीपैड का निर्माण संत-महात्माओं की आपत्ति के बाद पूरी तरह से अधर में लटक गया है.

अफसरों को कई बार दी गई जानकारी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरी गिरि व जूना अखाड़ा के संत-महात्माओं के विरोध के बाद मई के पहले सप्ताह में हेलीपैड का निर्माण कार्य रोक दिया गया था. तब से लेकर अब तक क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव की ओर से कमिश्नर डॉ. आशीष कुमार गोयल व प्रमुख सचिव पर्यटन अवनीश कुमार अवस्थी को कई बार प्रकरण की जानकारी दी गई. पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी को प्रकरण की जानकारी दी गई है लेकिन समाधान नहीं निकला. विभागीय कर्मचारियों की मानें तो भाजपा के एक बड़े नेता से महंत हरी गिरि की नजदीकी की वजह से कोई इस मामले में बोलना नहीं चाह रहा है.

31 अक्टूबर तक थी डेडलाइन

त्रिवेणी दर्शन के बगल में ढाई एकड़ जमीन पर हेलीपैड का निर्माण कराने के लिए पांच करोड़ रुपए का बजट रिलीज किया गया था. बजट रिलीज होने के बाद निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया था. निर्माण कार्य 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया था. संतों के विरोध के बाद तीन महीने से अधिक का वक्त निकल चुका है लेकिन समाधान ना होने की वजह से इस ड्रीम प्रोजेक्ट के भी डूबने का खतरा मंडराने लगा है.

हेलीपैड के प्रकरण में समाधान कराने के लिए अधिकारियों को कई बार सूचना दी गई है. हम लोग सिर्फ समाधान होने का इंतजार कर सकते है. कोई समाधान निकल जाता है तो कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग से आगे की कार्रवाई शुरू कराई जाएगी.

अनुपम श्रीवास्तव,

क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी