पाकिस्तान चुनाव आयोग पर आरोप
लाहौर (पीटीआई)।
मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद की पार्टी मिली मुस्लिम लीग (एमएमएल) ने सोमवार को पाकिस्तान के चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि आयोग ने अदालत की अवमानना की है और जानबूझकर एमएमएल को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत करने में देरी कर रही है। बता दें कि सईद की पार्टी एमएमएल का राजनीतिक दल के रूप में अभी तक चुनाव आयोग द्वारा पंजीकरण नहीं किया गया है। इसको लेकर एमएमएल के अध्यक्ष सैफुल्लाह खालिद ने सोमवार को एक बयान में कहा, 'रणनीति का उपयोग कर राजनीतिक दल के रूप में एमएमएल का रजिस्ट्रेशन अभी तक ना करने के चलते हम ईसीपी (इस्लामाबाद इलेक्शन कमीशन) के खिलाफ इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अवमानना ​याचिका ​दायर करने जा रहे हैं।'

कोर्ट के फैसले का उल्लंघन
खालिद ने कहा कि ईसीपी की 'रणनीति' उच्च न्यायालय के उस फैसले का स्पष्ट तौर उल्लंघन कर रही है, जिसमें कहा गया था कि एमएमएल के आवेदन पर ध्यान देते हुए जल्द ही एमएमएल का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन किया जाए, लेकिन ईसीपी द्वारा अदालत के फैसले पर अभी तक अमल नहीं किया गया है। गौरतलब है कि सईद ने 27 जुलाई को पाकिस्तान में होने वाले आम चुनावों को देखते हुए एमएमएल का रजिस्ट्रेशन ना होने के बावजूद पार्टी का प्रचार शुरू कर दिया है।

गृह मंत्रालय ने किया पंजीकरण का विरोध
बता दें कि पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने पिछले साल जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद की मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) का राजनीतिक पार्टी के रूप मे पंजीकरण का विरोध किया था। मंत्रालय का कहना था कि अगर मिल्ली मुस्लिम लीग का पंजीकरण राजनीतिक दल के रूप में हो गया तो इससे राजनीति में हिंसा और उग्रवाद पैदा होगा। इसके बाद मंत्रालय ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय से भी अनुरोध किया था कि वह एमएमएल की पंजीकरण के लिए याचिका पर विचार न करें। लेकिन कोर्ट ने सईद के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ईसीपी को एमएमएल का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन करने का निर्दश जरी किया।

लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख
गौरतलब है कि मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख रहा है। अमेरिका ने उसे व उसके संगठन को प्रतिबंधित कर दिया तो उसने जमात-उद-दावा के जरिये अपना काम काज शुरू कर दिया। अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकी की अपनी सूची में शुमार कर रखा है। अमेरिकी ने पिछले माह एमएमएल को भी को विदेशी आतंकी संगठन करार दिया था। उसका कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा के सदस्यों ने इसका गठन किया है।

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