संवासिनयों को नारी निकेतन से बालिका निकेतन शिफ्ट करने का मामला

-एक बच्चे की मां और शादीशुदा लड़कियों को बालिका निकेतन में शिफ्ट करने की तैयारी

-मेडिकल बोर्ड से उम्र का परीक्षण कराने के बाद ही तय हो पाएगी वास्तिविक उम्र

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देहरादून.

नारी निकेतन से जिन 11 संवासिनियों को नाबालिग बताकर बालिका निकेतन शिफ्ट करने की कवायद चल रही है, उनकी शिफ्टिंग से छोटे बच्चों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है. शिफ्ट की जाने वाली 11 संवासिनियों में अधिकतर कद-काठी से वयस्क लगती हैं, एक तो बच्चे की मां भी है. कुछ शादीशुदा है. कोई घर से भागी तो कोई प्रेमी के साथ पकड़ी गई है. चार लड़कियां मानसिक रूप से कमजोर हैं. बाल आयोग की टीम ने नारी निकेतन का निरीक्षण किया और हुलिए और कद काठी से वयस्क लगने के बावजूद संवासिनियों से ही उनकी उम्र पूछकर उन्हें बालिका निकेतन भेजने का फरमान सुना दिया. बाल आयोग के इस फरमान से नारी निकेतन से लेकर बालिका निकेतन तक हड़कंप मचा है. दस्तावेजी साक्ष्य ऐसे हैं जिन्हें झुठलाया नहीं जा सकता, जबकि वास्तिविक स्थिति इससे परे होने के कारण बालिका सदन में रह रही किशोरियों पर गलत असर पड़ सकता है.

कोर्ट के डिसीजन पर ही सवाल:

बाल आयोग के इस फरमान ने कोर्ट के डिसीजनों पर ही सवाल खड़े कर दिए. नारी निकेतन में रह रही संवासनियां कोर्ट के आदेश से वहां भेजी जाती है. कोर्ट उम्र के साथ साथ मामले की गंभीरता के आधार पर डिसीजन लेता है. ऐसे में बाल आयोग के फरमान पर अगर इन संवासनियों को बालिका निकेतन शिफ्ट कर दिया जाएगा तो यह कोर्ट के डिसीजन पर भी सवाल खड़ा कर देगा.

ये है मामला

दून में महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित नारी निकेतन में पिछले दिनों संवासनियों में बीमारी फैल गई थी. नारी निकेतन का निरीक्षण किया गया तो कुछ संवासनियों ने खुद को नाबालिग बताकर वहां से शिफ्ट करने की मांग की. इस पर सीडब्ल्यूसी और बाल आयोग की टीम ने नारी निकेतन का दौरा किया और 11 संवासिनियों को बालिका निकेतन शिफ्ट करने का फरमान सुना दिया.

नारी निकेतन और बालिका सदन के अलग पैरामीटर:

नारी निकेतन में वयस्क के साथ साथ ऐसे मामले जिनमें नाबालिग के मर्जी से भाग जाने,प्रेमी के साथ बरामद होने के केसेज में घर वालों के ठुकरा देने या लड़की के अपनी मर्जी से परिजनों के साथ जाने से इनकार कर देने के मामले में कोर्ट वहां भेजता है. नारी निकेतन में रह रही अधिकतर लड़कियां बालिग होने के बाद अपने प्रेमी के साथ ही जीवन निवार्ह करने की बात कहती है. दूसरी तरफ बालिका निकेतन में अनाथ और चाइल्ड लेबर के तहत रेस्क्यू की गई बच्चियों के अलावा ऐसे छोटे बच्चे रहते हैं, जो लावारिस मिले. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश पर यहां भेजे जाते हैं. इनमें से अधिकतर बच्चे स्कूल भी जाते हैं.

मानसिक विमंदित की केयर का संकट:

जिन संवासिनियों को बालिका निकेतन शिफ्ट करने की तैयारी है, उनमें 4 मानसिक विमंदित भी हैं. चर्चा है कि पहले ये बालिका निकेतन में थी. बड़ी होने पर केयर में दिक्कत हुई और अन्य बच्चों पर उनकी हरकतों की वजह से गलत इफेक्ट पड़ने के चलते नारी निकेतन शिफ्ट किया गया था. ताकि वहां रह रही बड़ी उम्र की संवासनियां उनका ध्यान भी रखे और समय पर इलाज व अन्य सुविधाएं भी मिल सके. अब उन्हें फिर से बालिका निकेतन शिफ्ट करने पर केयर का संकट खड़ा हो सकता है. बालिका निकेतन में स्टाफ भी कम है.

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संगत के साइड इफेक्ट का डर:

बालिका निकेतन परिसर में एक अलग कमरे में 11 संवासिनियों को रखे जाने के आदेश के बाद से वहां का स्टाफ भी पशोपेश में है. बालिका निकेतन की में रह रही लड़कियों को इसकी भनक लगी तो अंदरखाने उनके भी इसका विरोध करने की चर्चाएं हैं. दरअसल घर से भागकर शादी करने वाली लड़कियां, मानसिक विमंदित और कद काठी से वयस्क लगने वाली संवासनियां जब बालिका निकेतन में रहेने लगेंगी तो वहां कि बालिकाओं पर उनकी संगत का गलत इफेक्ट भी पड़ सकता है.

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उम्र और दस्तावेजों की कहानी:

नाबालिग होने के कारण शिफ्ट की जा रही संवासिनियों में एक तो बच्चे की मां है, उसका बच्चा भी साथ रहता है. दो अन्य उम्र में 18-से 20 वर्ष की लगती है. पूछने पर खुद की उम्र 13 वर्ष बताती है. यह बाल आयोग की टीम के भी गले नहीं उतरी. अधिकतर घर से प्रेमी से साथ भागी थी, पकड़ी गई तो कुछ को घर वालों ने अपनाने से इनकार कर दिया,कुछ ने घर वालों के साथ जाने से. चार विमंदित भी हैं. ये सब अगर छोटे बच्चों और स्कूल जाने वाली किशोरियों के साथ रहेंगी .

मेडिकल मुआयना कराना चाहिए:

इस मामले में उम्र का सही आंकलन करने के लिए शिफ्टिंग से पहले मेडिकल मुआयना कराना चाहिए. मेडिकल बोर्ड उनके शारीरिक विकास के आधार पर में उम्र तय करे. इसके बाद शिफ्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए.

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बाल आयोग की ओर से नारी निकेतन से 11 संवासिनियों को नारी निकेतन में शिफ्ट करने को कहा गया है. पहले उनका रिकार्ड चेक करेंगे. उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी.

प्रत्यूष सिंह, एसडीएम सदर

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नारी निकेतन ओवरलोड है,बालिका निकेतन में जगह है. चार बालिकाएं मानसिक विमंदित

हैं. उनके इलाज के लिए जो टीम नारी निकेतन आती है वही बालिका निकेतन भी पहुंच जाएगी.

ऊषा नेगी, अध्यक्ष, बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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बाल आयोगके निर्देश स्पष्ट नहीं हैं. नारी निकेतन में 11 संवासिनियां मानसिक विमंदित हैं. उनमें से सिर्फ 4 को कैसे शिफ्ट कर सकते हैं. अन्य के मामले कोर्ट में पेंडिंग हैं.

मीना बिष्ट, जिला प्रोबेशन अधिकारी