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LUCKNOW : एप्पल तिवारी विवेक तिवारी हत्याकांड को करीब पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन उस काली रात को मिले सदमे से अभी तक घटना की इकलौती गवाह सना उबर नहीं पाई है. सना ने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट को उस रात का पूरा सच बयां किया.

जीप में बैठाया और ले गये
सना ने बताया कि विवेक सर को लोहिया हॉस्पिटल ले जाने के बाद पुलिस वाले विवेक के मोबाइल फोन से उनके घरवालों को सूचना नहीं दे रहे थे. लोहिया अस्पताल में ही मैंने पुलिसवालों को कहा कि मुझे अपना मोबाइल लेने जाना है, जिससे मैं अपने लोगों को सूचना दे सकूं. इस पर वह मुझे अपनी जीप में बैठाकर निकले और पहले कैसरबाग थाना लाए.

बनाते रहे दबाव
यहां एक घंटे के बाद मुझे किसी और जगह ले गए, जिसको मैं नहीं जानती थी. पुलिस वाले मुझपर बार-बार बयान बदलने के लिए कह रहे थे. बहुत घुमाने के बाद मुझे सुबह करीब चार बजे गोमतीनगर थाना लाया गया. तब मुझे पता चला कि शायद उनकी मौत हो गई है. यहां से सुबह करीब छह बजे मुझे पुलिस ने घर पर छोड़ा.

एक गिलास पानी तक नहीं दिया
सूत्रों के मुताबिक पुलिस सना को कैसरबाग कोतवाली लेकर गई थी. वहां करीब एक घंटे तक उसे बैठाया गया. इसके बाद कैसरबाग पहुंची एक महिला कांस्टेबल और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ उसे दोबारा गोमती नगर थाने लाया गया. जहां गोमती नगर थाने में महिला सेल में बैठाया गया. वहां एक महिला दरोगा के साथ एक महिला पुलिस कर्मी भी थी. जो बार-बार उसे अपराधी का साथ देने की बात कहकर जेल भेजे की धमकी दे रही थी. इसके बाद पुलिस के आला अफसर भी मौके पर आ गए थे. उनके पूछने पर मैं रोने लगी. 4 घंटे तक पुलिस एक ही बात को बार-बार पूछती रही लेकिन एक बार भी उन्हें एक गिलास पानी तक नहीं दिया.

आरोपी प्रशांत को भी कैसरबाग ले गई थी पुलिस
सूत्रों के मुताबिक पुलिस आरोपी प्रशांत को भी कैसरबाग कोतवाली ले गई थी. आखिर जब सना क्यों वहां लेकर गई थी पुलिस और जब सना वहां पहुंची थी तो आरोपी सिपाही को क्यों कैसरबाग ले जाया गया था. इस सवाल का न तो पुलिस विभाग के पास कोई जवाब है और न ही इस मामले को कोई चुप्पी तोड़ रहे है अफसर.