- रमेश शाह के फरार होने के बाद चार महीने से बंद है मार्ट

- खाने-पीने का सामान बरसात में हो गया खराब

GORAKHPUR: टेरर फंडिंग के मास्टरमाइंड रमेश के सत्यम मार्ट में रखे सभी सामान अब खराब होने लगे हैं. तीन महीनों से बंद दुकान के अंदर से अब बदबू आने लगी है. इससे परेशान होकर मकानमालिक की ओर से अब दुकान खुलवाने के लिए विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. हालांकि रमेश की गिरफ्तारी के बाद से कोई उसकी दुकान खुलवाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. इसके लिए रमेश को सत्यम मार्ट के लिए जगह दिलाने वाले मोहम्मद दिलशाद ने विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया अपना ली है.

टेरर फंडिंग की रकम से खुला था मार्ट

गौरतलब है कि टेरर फंडिंग की रकम से रमेश ने शाहपुर इलाके के असुरन स्थित सत्यम मार्ट खोल रखा था. हालांकि 24 मार्च को शहर में एटीएस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद से ही रमेश शाह जहां फरार हो गया, वहीं, सत्यम मार्ट पर ताला लग गया. हालांकि इन तीन महीनों के दौरान वह अपने मकानमालिक और दुकान दिलाने वाले दिलशाद से बराबर संपर्क में रहा. वह उन लोगों को आश्वासन देता रहा है, जल्द ही सबकुछ ठीक हो जाएगा और वह ब्याज सहित किराया व अन्य बकाया चुका देगा.

गिरफ्तारी के बाद खाली कराने की तैयारी

लेकिन इस बीच 19 जून को रमेश शाह महाराष्ट्र के पुणे से एटीएस के हत्थे चढ़ गया. उसकी गिरफ्तारी के बाद अब मकानमालिक की ओर से सत्यम मार्ट खाली कराने की तैयारी शुरू करा दी गई है. मोहम्मद दिलशाद ने बताया कि चूंकि दुकान में अधिकांश खाने-पीने के सामान रखा था, ऐसे में वह शायद अब खराब होने लगा है. दुकान के अंदर से बदबू भी आ रही है. अगल-बगल के लोगों ने इसकी जानकारी दी तो मैने खुद जाकर देखा, लेकिन दुकान में ताला बंद होने की वजह से उसे फिलहाल खोला नहीं जा सकता है. इसके लिए विधिक सहायता ली जा रही है. ताकि दुकान खुलवाकर उसे अपने कब्जे में लिया जा सके. दिलशाद ने बताया कि फरारी के दौरान रमेश ने दुकान के अंदर की लाइटें तक जली छोड़ दी थी. जिससे शार्ट सर्किट की वजह से दुकान में आग लगने का भी खतरा बना हुआ है. जल्द ही विधिक सहायता के बाद दुकान खाली करा दिया जाएगा.

वर्जन-

अब तक जांच में यह सामने आया है कि टेरर फंडिंग की रकम से ही रमेश ने सत्यम मार्ट खोल रखा था. ऐसे में अब उसके मार्ट पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. कोर्ट के किसी निर्देश के बिना मकान मालिक या कोई अन्य दुकान नहीं खुलवा सकता.

असीम अरुण, आईजी-यूपी एटीएस