पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़त जारी है. जिस पर अंकुश लगने की भी फिलहाल कोई संभावना दूर तलक नजर नहीं आ रही. हालांकि, बढ़ती कीमतों के डर से वाहनों का उपयोग तो बंद नहीं कर सकते, लेकिन इन परिस्थितियों में यह जरूरी है कि वाहन को जरूरत पड़ने पर ही चलाएं. संभावना है कि वाहन चलाते समय डीजल या पेट्रोल की बचत कर अपने बजट को भी संभाल पाएंगे. दैनिक जागरण आईनेक्स्ट 'तेल की मार' अभियान के तहत आज आपको कुछ एक्सप‌र्ट्स के टिप्स बताएगा, जिनको फॉलो कर आप डीजल पेट्रोल जो भी वाहन चलाते हैं उसके ईधन की बचत कर पाएंगे.

BAREILLY:

सेविंग से जेब व पर्यावरण पर असर

डीजल हो या पेट्रोल दोनों ही ज्वलनशील होते हैं. प्रजेंट टाइम में बढ़ते जा रहे पॉल्युशन में व्हीकल्स से निकलने वाले धुआं बड़ी वजह है. धुएं की चपेट में आने से बीमारियों समेत पर्यावरण प्रभावित होता है. ऐसे में अगर उसका इस्तेमाल सही ढंग से किया जाए तो कई फीसदी तक शहर से पॉल्यूशन भी कम हो सकता है. दूसरी ओर, वाहनों का इस्तेमाल सही से होगा तो डीजल और पेट्रोल की बचत भी होगी. सनद रहे कि यह बचत न सिर्फ वाहन में पेट्रेाल की होगी बल्कि आपकी जेब की होगी. क्योंकि ईधन जितना कम खपत होगा उसे दो तरफा फायदा होना तय है. ऐसे में एक जिम्मेदार नागरिक बनकर अपनी गाढ़ी कमाई को 'धुआं न बनने दें.

कलीग्स हैं तो कर सकते हैं 'पूलिंग'

फोर व्हीलर हो या टू व्हीलर बरेली में पूलिंग सिस्टम शुरू हो गया है. बाइक हो या कार अगर एक ही तरफ पड़ोसियों या फ्रेंड्स को जाना है तो वह अपने-अपने पर्सनल व्हीकल्स प्रिफर करने के बजाय एक साथ ही निकल रहे हैं. जरूरी होने पर घर से कुछ दूरी पर पिक अप भी कर रहे हैं. ऐसे में अगर आप भी चाहें तो पूलिंग सिस्टम के जरिए ईधन की बचत कर सकते हैं. हालांकि, जितने भी लोग हैं वह वाहन में इस्तेमाल होने वाले ईधन के मुताबिक रुपए कॉन्ट्रीब्यूट करें. चालाकी से अगर किसी पर बोझ बनेंगे तो यहां प्रॉब्लम होगी. वहीं, अगर ऑफिस आवागमन में वाहन साझा करते हैं तो इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव भी कम होता है.

किस एफर्ट से कितनी सेविंग

- वाहन के टायरों में हवा परफेक्ट होने से स्पीड बढ़ेगी साथ ही फ्यूल की खपत भी 1 परसेंट कम होगी.

- एवरेज व्हीकल की स्पीड 45-55 किमी प्रति घंटा रखने से 30 परसेंट तक खपत कम होगी

- एयरोडायनेमिक बनावट का ध्यान रखें, वाहन पर जरूरत से ज्यादा बाहरी एसेसरीज न लगाएं

- वाहन में 50 किलो भार कम करने से ईधन की खपत दो परसेंट तक कम की जा सकती है

- ट्रैफिक सिग्नल पर वाहन का इंजन बंद करने से करीब 20 परसेंट खपत कम कर सकते हैं

- संभव हो तो व्हीकल का उपयोग कम करें. थोड़ी दूरी के लिए पैदल या साइकिल प्रयोग करें

- बेवजह एसी या ब्लोअर चलाने से 10 परसेंट एक्स्ट्रा फ्यूल खर्च होता है. जरूरी होने पर चलाएं

खामियां, जिस पर हम ध्यान नहीं देते

टेम्प्रेचर इफेक्ट - कार या बाइक में फ्यूल सुबह या देर शाम ही भरवाएं इस दौरान फ्यूल का घनत्व अधिक होता है. तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी से वाष्पीकरण बढ़ जाता है.

लो टि्रगर रखें - अक्सर व्हीकल के टैंक में फिलिंग करने वाले नोजल पर ट्रिगर के तीन चरण होते हैं लो, मिडल और हाई. जल्दी में न हों तो लो मोड में तेल भरवाएं. इससे फ्यूल का वाष्पीकरण कम होगा.

टंकी में फ्यूल कैपेसिटी - व्हीकल के तेल का टैंक कभी खाली न होने दें. कम या खत्म होने पर लोग पेट्रोल पंप का रुख करते हैं. टंकी का चौथाई हिस्सा खाली होते ही तेल भरवाएं. इससे वाष्पीकरण कम होगा.

वेटिंग का अलर्ट - ट्रैफिक सिग्नल के अलावा किसी के इंतजार के दौरान भी गाड़ी को बंद कर दिया करें. सनद रहे कि ट्रैफिक सिग्नल पर समय का पता चलता है लेकिन वेटिंग के दौरान यह आभास नहीं होता.

ग्लासेज का मूवमेंट - गाड़ी के ग्लास नीचे होने पर एक ड्रैग पैदा होता है जो गाड़ी को आगे बढ़ने में अवरोध पैदा होने से स्पीड प्रभावित होती है. संभव हो तो ग्लासेज को बंद रखें ताकि एरो स्पेस बरकरार रहे.

छाया में खड़ी करें - गाड़ी को छांव में खड़ी करें. क्योंकि गाड़ी जितनी ठंडी होगी, उसकी टंकी से उतना ही कम वाष्पीकरण होगा. यानि उतना ही कम ईंधन भाप बनकर उड़ेगा.

बिजी ट्रैफिक व मौसम - शहर में बिजी ट्रैफिक का निश्चित समय होता है. संभव हो तो उस दौरान वाहन न चलाएं, इससे ट्रैफिक में बेवजह फ्यूल की खपत की बचत होगी.

माैसम इफेक्ट - बारिश हो या तेज हवा चल रही हो या जब बैरोमेट्रिक प्रेशर कम हो, ऐसी स्थिति में व्हीकल्स को कम से कम ही ड्राइव करें. इस दौरान अवरोध के चलते फ्यूल की बर्बादी होती है.

टाइम से फ्यूल मैनेजमेंट - जरूरी सामान लेने के लिए घर से निकलने समय कार्यो की लिस्ट बना लें. सभी कार्य एक बार में निपटाने से समय और फ्यूल दोनों की बचत होगी. जैसे, घरेलू इस्तेमाल की ऐसी चीजें जो खराब नहीं होतीं, उन्हें थोक में खरीदें इससे बार-बार व्हीकल यूज की जरूरत नहीं होगी.