नई दिल्ली (पीटीआई)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिये राजनीतिक फंडिंग को नहीं रोका लेकिन इस स्कीम में पारदर्शिता लाने के लिए अदालत ने सभी राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया है कि वह चुनाव आयोग को दान में मिले पैसे का रिसीप्ट और अकॉउंट डिटेल देने के साथ ही उन्हें दानकर्ताओं की पहचना के बारे में बताएंगे। एक अंतरिम आदेश में, शीर्ष अदालत ने सभी राजनीतिक दलों को 30 मई तक दानकर्ताओं के बॉन्ड और बैंक खाते का ब्योरा पोल पैनल को देने का निर्देश दिया है। बता दें कि अदालत ने केंद्र के उस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार का कहना था कि आम चुनाव खत्म होने तक अदालत को इस योजना में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

कोर्ट ने वैधता को घटाने का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वह इनकम टैक्स, इलेक्टोरल और बैंकिंग के कानूनों में किए गए बदलावों की विस्तार से जांच करेगी और उन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के अनुरूप बनाएगी। इसके साथ कोर्ट ने वित्त मंत्रालय को इलेक्टोरल बॉन्ड्स की वैधता को 10 दिन से घटाकर पांच दिन तक करने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की खंडपीठ ने सुनाया। सरकार ने 2 जनवरी, 2018 को चुनावी बॉन्ड योजना 2018 के बारे में बताया था। बता दें कि केंद्र सरकार की इस स्कीम के खिलाफ असोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स नाम के एनजीओ ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। एनजीओ ने अपनी याचिका में इस स्कीम की वैधता को चैलेंज करते हुए कहा था कि इस स्कीम पर रोक लगाई जानी चाहिए या दानकर्ताओं की जानकरी को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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भारत का कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है इलेक्टोरल बॉन्ड

बता दें कि इस योजना के प्रावधानों के अनुसार, इलेक्टोरल बॉन्ड भारत के किसी व्यक्ति द्वारा खरीदा जा सकता है। एक व्यक्ति एक ही इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद सकता है, अब वह चाहे तो अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर भी उसे खरीद सकता है। अधिसूचना के अनुसार, चुनावी बॉन्ड केवल एक अधिकृत बैंक के साथ एक बैंक खाते के माध्यम से एक योग्य राजनीतिक पार्टी द्वारा एन्कोड किया जाएगा। बता दें कि कोर्ट ने गुरुवार को आदेश को सुरक्षित रख लिया था और कहा कि अगर पारदर्शी राजनीतिक फंडिंग के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड के खरीदारों की पहचान नहीं हो पाती है, तो सरकार का चुनावों में काले धन पर लगाम लगाने का प्रयास बेकार हो जायेगा। इस स्कीम को लॉन्च करने के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि इसका उद्देश्य चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को खत्म करना है।

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