- भाजपा नेता भी कर रहे एक्ट का विरोध, सोशल मीडिया पर जंग शुरू

- यूपी पुलिस ने जारी किया अलर्ट, आंदोलनकारियों पर रहेगी पैनी नजर

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LUCKNOW : केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में एससी-एसटी एक्ट में किए गये बदलाव के खिलाफ तमाम संगठनों द्वारा गुरुवार को भारत बंद का आह्वान किया गया है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर शुरू हुई जंग अब सड़कों पर भी नजर आने वाली है. खास बात यह है कि एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान का विरोध अब खुद भाजपा नेता करने लगे हैं. इनमें सांसद और विधायक भी शामिल हैं. वहीं सवर्ण समुदाय के लोगों ने भी मुखर होना शुरू कर दिया है और वे बंद को सफल बनाने में जुट गये है. इसे ध्यान में रखकर डीजीपी मुख्यालय ने भी भारत बंद को लेकर अलर्ट जारी करते हुए पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त करने के निर्देश दिए हैं.

सोशल मीडिया से शुरुआत

केंद्र सरकार द्वारा इस बाबत लिए गये निर्णय के विरोध में सवर्ण समुदाय का विरोध बुधवार को आगरा से शुरू हुआ है. इसके अलावा नोएडा और मथुरा में भी इसका विरोध तेज हो गया है. दरअसल इसका विरोध कर रहे लोगों ने सोशल मीडिया पर ही 6 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया था जिसे खासा समर्थन मिलने लगा था. इसके दुरुपयोग से जुड़ी वीडियो और पोस्ट शेयर होने के साथ बहस का सिलसिला भी शुरू हो गया. वहीं भाजपा नेताओं ने भी उनके समर्थन में बयान देकर इसे बल दे दिया. भाजपा सांसद कलराज मिश्र ने बयान दिया है कि केंद्र सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. वहीं प्रतापगढ़ सदर से भाजपा विधायक संगम लाल गुप्ता ने भी कहा है कि इस एक्ट का दुरुपयोग होने से निर्दोष लोगों को परेशान होना पड़ता है. बहरहाल अब सबकी नजरें गुरुवार को होने वाले भारत बंद की सफलता पर टिकी है. यदि यह सफल रहा तो बड़ा राजनीतिक उलटफेर भी देखने को मिल सकता है.

नोटा को लेकर भी रार

इतना ही नहीं, एससी-एसटी एक्ट के विरोध में जुट रहे लोग आगामी लोकसभा चुनाव में नोटा का विकल्प चुनने की चेतावनी भी देने लगे हैं. हालांकि इसे लेकर उनके बीच भी एकराय कायम नहीं हो पा रही है और रार तेजी होती जा रही है. इसके विरोध और समर्थन में अलग-अलग तर्क भी दिए जा रहे है. दरअसल भाजपा नेता उदितराज ने यह बयान देकर आग में घी डालने का काम कर दिया कि जो सवर्ण इसका विरोध कर रहे हैं उनके विरोध से कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि यह वर्ग वोट डालने नहीं जाता है. सवर्णो के इलाके में हमेशा वोट प्रतिशत कम रहता है.

अलर्ट पर पुलिस, मथुरा सबसे सेंसटिव

वहीं भारत बंद को लेकर डीजीपी मुख्यालय द्वारा 14 संवेदनशील जिलों को अलर्ट जारी किया है. एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि लखनऊ, मथुरा, इलाहाबाद, बिजनौर, कौशांबी, कासगंज, संत रविदास नगर, बलिया, हरदोई, बरेली और आजमगढ़ जिलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है. इसकी वजह यहां पर दूसरे जिलों के मुकाबले होने वाले ज्यादा कार्यक्रम और प्रदर्शन हैं. बाकी सभी जिलों के कप्तानों को भी सोशल मीडिया पर नजर रखने को कहा गया है. मथुरा में सबसे बड़े प्रदर्शन की सूचना है. मथुरा में कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने कथा के दौरान एससी एसटी एक्ट को लेकर विरोध जताने की बात कही है. खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने के संदेश के साथ होने की संभावना है. प्रदर्शन का आह्वान करने वालों में किसी बड़े राजनैतिक दल या नेता का नाम अभी तक सामने नहीं आया है. सवर्ण और ओबीसी के अलग-अलग छोटे संगठनों ने प्रदर्शन की घोषणा की है. वहीं मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है. इस बाबत आगरा, कानपुर, झांसी, ललितपुर जैसे जिलों को खास अलर्ट रहने के लिए कहा गया है.