-आधे लोगों का किया प्रमोशन, वहीं आधे को छोड़ा

-वहीं कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद दे दिया एक्सटेंशन

-उच्च शिक्षा निदेशक ने साफ किया नहीं कर सकते हैं एक्सटेंशन

केस - 1

शासन के एक आदेश के हिसाब से सभी कर्मचारियों को इनक्रीमेंट दिया जाना था. लेकिन यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों ने आधे एंप्लाइज का इनक्रीमेंट किया, जबकि आधे कर्मचारियों को इसका फायदा कार्य परिषद की डेट से दिया गया. यूनिवर्सिटी के इस दोहरे रवैये से कर्मचारी परेशान हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई सॉल्युशन नहीं मिल सका है.

केस - 2

शासन का आदेश है कि सरकारी, स्वायत्तशासी सार्वजनिक संस्थाओं, नगर निगम के कर्मचारियों को अधिवर्षता आयु के बाद सेवा वृद्धि या पुनर्नियुक्ति स्वीकार न की जाए. लेकिन यूनिवर्सिटी में रिटायर होने वाले कुछ खास 3-4 कर्मचारियों का एक्सटेंशन कर दिया गया है, जबकि कुछ कर्मचारी अभी वहां दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी है.

यह दो केस सिर्फ एग्जामपल भर हैं. यूनिवर्सिटी में ऐसे कई शासनादेश हैं, जिनकी जिम्मेदार खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं. लेकिन जानने के बाद भी जिम्मेदार मौन हैं. शासन के आदेशों की अनदेखी से स्टूडेंट्स और कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं इसकी वजह से कुछ लोग मलाई काट रहे हैं, तो वहीं कुछ परेशान होकर इस दर से उस दर गुहार लगा रहे हैं. काफी शिकायतों के बाद अब कुछ शासनादेशों पर जिम्मेदारों की नजर पड़ी है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी में हलचल मची हुई है.

हकदार को नहीं मिल रहा फायदा

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में पिछले कुछ माह में कुछ कर्मचारियों का रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन कर दिया गया. नियमानुसार उनसे अहम काम नहीं लेने चाहिए, लेकिन यूनिवर्सिटी के जिम्मेदार उनसे अब भी वहीं काम ले रहे हैं, जो वह करते आए हैं. जबकि, उस पोस्ट के हकदार अब भी इंतजार में हैं कि उन्हें कब जिम्मेदारी मिलेगी. इतना ही नहीं रिटायर होने वाले कर्मचारियों की तादाद काफी ज्यादा है, लेकिन एक्सटेंशन की बात करें तो यह सिर्फ चुनिंदा लोगों का ही किया गया है, जिसकी वजह से कर्मचारी परेशान हैं.

इनक्रीमेंट को लेकर भी लोचा

यूनिवर्सिटी में इनक्रीमेंट को लेकर भी काफी लोचा है. जिम्मेदारों को कर्मचारियों का इनक्रीमेंट शासन के आदेश की डेट से करना था, लेकिन इसको लेकर यूनिवर्सिटी में दोहरा रवैया अपनाया गया है. एक तरफ जहां कुछ कर्मचारियों को शासन के आदेश की डेट से इनक्रीमेंट का फायदा दिया गया है, वहीं यूनिवर्सिटी में एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क से जुड़े लोगों को कार्यपरिषद की डेट से इसका फायदा दिया गया है. शासन के आदेश को कार्यपरिषद के सिर्फ संज्ञान में लाया जा सकता है और वह शासन के आदेश को लागू करने से संबंध में कोई निर्देश नहीं दे सकती.

वर्जन

दो तरह से इनक्रीमेंट दिए जाने का मामला संज्ञान में आया था. इसको दोबारा विचार करने के लिए रखा गया है. शासन का आदेश है, इसलिए सभी को इसका लाभ शासनादेश की डेट से ही मिलेगा. वहीं स्पेशल क्लॉज में कर्मचारियों को दो साल तक एक्सटेंशन दिया जा सकता है.

- बीरेंद्र चौबे, फाइनेंस ऑफिसर, डीडीयूजीयू