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PATNA: दिल्ली के करोलबाग स्थित होटल अर्पित पैलेस की तरह पटना के होटल, मॉल और अपार्टमेंट में भी आग लगी तो काफी संख्या में लोग हताहत हो सकते हैं. फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि राजधानी के 70 फीसदी से अधिक होटलों, मॉल और बिल्डिंगों में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा. नोटिस देने के बावजूद सुरक्षा के मानकों को पूरा नहीं किया जा रहा है.

8 हजार बिल्डिंग हैं असुरक्षित

राजधानी में 8 हजार अपार्टमेंट, होटल और कमर्शियल बिल्डिंग के मालिक फायर ब्रिगेड के नियमों का पालन नहीं कर रहे. इसका पालन कराने में फायर कंट्रोल डिपार्टमेंट की भूमिका भी संदेह के दायरे में है. विभाग ने पिछले 4 सालों में 10 हजार से अधिक अपार्टमेंट और होटल मालिकों को नोटिस जारी किया लेकिन इसे लागू करवाने के लिए मौके का निरीक्षण नहीं किया गया.

नहीं की जाती है जांच

फायर ब्रिगेड की ओर से जारी निर्देशों में बताया गया है कि शहर के सभी अपार्टमेंट, होटल और कॉमर्शियल बिल्डिंग के मालिकों को हर साल एनओसी लेना पड़ेगा.

एनओसी लेने के लिए पहले आवेदन देना होता है फिर फायर ब्रिगेड के एक्सपर्ट मौके पर जाकर जांच करते हैं.

आग से सुरक्षा के सभी मानक पूरा पाए जाने पर ही एनओसी जारी किया जाता है. स्थिति यह है कि पिछले 5 सालों में विभाग को एनओसी के लिए लगभग 3 हजार से अधिक मिले हैं लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से मौके की जांच नहीं हो पाती है. फायर ब्रिगेड की ओर से बिना जांच किए ही एनओसी जारी कर दिया जाता है.

जांच करने पर अफसरों को मिलती है सजा

सूत्रों ने बताया कि अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच करने से फायर ब्रिगेड के अधिकारी डरते हैं. शहर के अधिकांश होटल, मॉल और अपार्टमेंट के मालिक या तो ऊंची पहुंचे वाले वाले होते है या दबंग. पहले भी कई बार जांच की कोशिश की गई लेकिन जांच करने वाले अधिकारी का तबादला कर दिया गया. वर्ष 2004-05 में फायर डिपार्टमेंट के चीफ सेक्रेटरी और 2016-17 में चीफ फायर ऑफिसर उपेंद्र प्रसाद सिंह पर जांच करने की गाज गिर चुकी है. इन अधिकारियों ने बोरिंग रोड पर अग्नि शमन नियमों को तोड़ने वाले 30 बिल्डिंग के मालिको को नोटिस भेजा था. नोटिस जारी होने के अगले दिन ही अधिकारियों का पटना से बाहर ट्रांसफर कर दिया गया.