- शहर के मौसम विभाग ऑफिस में लगी है मशीन, देगी 200 किलोमीटर की सटीक जानकारी

GORAKHPUR: पृथ्वी के अंदर होने वाली हलचलों के रहस्य को जानने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने शहर के मौसम विभाग ऑफिस में सेसमिक मशीन स्थापित की है. यह 200 किलोमीटर की रेंज में दो रिएक्टर तक की स्पीड के भूकंप की गणना कर लेगी. मशीन से मिलने वाले डाटा को रिसर्च में यूज किया जाएगा. भूकंप के लिहाज से पूर्वाचल डेंजर जोन माना जाता है. सेसमिक मशीन 200 किलोमीटर के इलाके में आने वाले छोटे-छोटे भूकंपों के डाटा को रीड करेगी जिसे विभाग की ओर से दिल्ली भेजा जाएगा. इन आंकड़ों के अध्ययन से बड़े भूकंपों से होने वाले नुकसानों को कम करने के लिए वैज्ञानिक नए शोध करेंगे.

5 फीट अंदर तक लगाई गई है मशीन

पृथ्वी के अंदर होने वाले हलचलों को बारीकी से रीड किया जा सके, इसके लिए सेसमिक मशीन को पांच फीट अंदर तक स्थापित किया गया है. वहीं मशीन का ढाई फीट हिस्सा बाहर रखा गया है जिस पर दो सेंसर लगाए गए हैं. डिजिटल मशीन को चौबीस घंटे तक बिजली देने के लिए बैट्री भी लगाई गई है.

शोध के काम आएगा डाटा

सेसमिक मशीन दिन में जो भी डाटा रीड करती है उसे शाम को मेन सेंटर दिल्ली भेज दिया जाता है. वहां के वैज्ञानिक डाटा का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि किस-किस रिएक्टर के भूकंप सबसे अधिक आते हैं. इस दौरान पृथ्वी की स्थिति को भी रीड किया जाएगा. दो से तीन माह में मशीन में डिजिटल सेंसर भी लगाया जाएगा जो ऑटोमेटिक तरीके से डाटा को तुरंत ही मेन कार्यालय में भेज देगा.

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पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कर रहे खोज

भूकंप से होने वाले नुकसान से बचने के लिए पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ऐसी खोज में लगे हैं जो आने से पहले ही भूकंप के बारे में बता सके. लेकिन अभी तक किसी को भी यह कामयाबी नहीं मिल सकी है. माना जा रहा है कि गोरखपुर में लगाई गई सेसमिक मशीन इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर लगाई गई है. मशीन से प्राप्त कम रिएक्टर और अधिक रिएक्टर के भूकंप को रीड कर उनका विशलेषण किया जाएगा.

वर्जन

भूकंप के लिहाज से उत्तर प्रदेश के डेंजर इलाकों में सेसमिक मशीनें लगाई गई हैं. इनसे मिलने वाला डाटा रिसर्च में काफी सहायक होगा.

- जी सुरेश, पृथ्वी वैज्ञानिक

सेसमिक मशीन को जमीन से 5 फीट अंदर स्थापित किया गया है जिससे सटीक सूचनाएं मिल सकें.

- तीर्थेद्र बहादुर सिंह, प्रभारी अधिकारी, मौसम विभाग