- फेक करेंसी और आ‌र्म्स की सप्लाई के लिए यूज कर रहे

- उम्रदराज होने के चलते पुलिस नहीं करती शक

mayank.srivastava@inext.co.in

LUCKNOW : पुलिस से एक कदम आगे चलने वाले क्रिमिनल्स हर बार बचने के लिए अनोखा पैतरा अंजाम रहे हैं. माफिया तस्करी के लिए अब सीनियर सिटीजन का सहारा ले रहे हैं. कभी यूथ और महिलाओं को टारगेट करने वाले तस्कर अब तन्हा और जरूरतमंद बुजुर्गो को तस्करी के लिए 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वह उम्रदराज होने के चलते पुलिस की निगाह से बच सकें. हाल में सिविल पुलिस और एसटीएफ ने ऐसे दो मामले पकड़े, जिनमें तस्करी के लिए जरूरतमंद बुजुर्गो को यूज किया गया. उनके जरिए देश और प्रदेश में फेक करेंसी और हथियार सप्लाई किया जा रहा था.

पहले यूथ फिर महिलाएं की टारगेट

नशीले पदार्थ, फेक करेंसी और आ‌र्म्स की सप्लाई के लिए माफिया पहले यूथ और फिर महिलाओं को टारगेट करते थे. ज्यादातर केस में यूथ के पकड़े जाने के बाद उन्होंने महिलाओं को टारगेट किया था. पूर्वाचल एरिया में नशीले पदार्थ की सप्लाई के लिए नेपाली महिलाओं को इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि कई बार उनके पकड़े जाने के बाद तस्करों ने अब नया रास्ता निकाला है.

तन्हा और जरूरतमंद बुजुर्गो को कर रहे टारगेट

यूथ और महिलाओं के पकड़े जाने का डर बढ़ते देख तस्कर अब ऐसे बुजुर्ग को टारगेट कर रहे हैं जो तन्हा और जरूरतमंद हैं. इनकी उम्र के चलते उन पर पुलिस शक नहीं करती है. कम रिस्क के साथ आसानी से नशीला पदार्थ, फेक करेंसी और आ‌र्म्स पूरे देश में सप्लाई किया जा रहे हैं. हाल ही में सिविल पुलिस और एसटीएफ ने ऐसे कुछ मामले भी पकड़े हैं, जिसमें बुजुर्गो को इस्तेमाल किया गया.

अपराध की नहीं होती जानकारी

बुजुर्गो को उनके द्वारा किये गये अपराध की जानकारी नहीं होती है. उन्हें ट्रेन के जरिये माल एक स्थान से दूसरे स्थान पर सप्लाई करना होता है. ट्रेन के आने जाने के टिकट के साथ उन्हें चंद रुपये दिए जाते हैं. इमोशनल अटैच के जरिए उन्हें जाल में फंसाया जाता है. यह बुजुर्ग पकड़े जाने पर तस्कर का नाम और पता भी नहीं बता पाते हैं. ऐसे में पुलिस सरगना तक नहीं पहुंच पाती है.

केस एक-

सब्जी विक्रेता महिला को बनाया टारगेट

बिहार के सीवन जिले में बुजुर्ग सब्जी विक्रेता महिला को तस्करों ने जाल में फंसा कर अवैध आ‌र्म्स की एक पोटली सप्लाई करने के लिए दी. मुज्जफरनगर अवैध आ‌र्म्स को सप्लाई किया जाना था. बुजुर्ग महिला के ट्रेन के आने और जाने का रिजर्वेशन भी कराया गया और उसे बताया कि मुज्जफरनगर रेलवे स्टेशन पर उसे एक व्यक्ति मिलेगा और उसे यह पोटली देनी होगी. इससे पहले एसटीएफ को इसकी भनक लग गई और उन्होंने जीआरपी की मदद से बुजुर्ग महिला को पकड़ लिया. उसके पास से अवैध आ‌र्म्स भी मिले. हालांकि पूछताछ में सब्जी विक्रेता बुजुर्ग महिला सरगना के बारे में कुछ भी नहीं बता सकी.

केस नंबर दो-

सरगना तक नहीं पहुंच सकी

फेक करेंसी की सप्लाई के लिए तन्हा बुजुर्गो का सहारा लिया जा रहा है. इलाहाबाद में रहने वाले एक बुजुर्ग को करीब 22 हजार रुपये की फेक करेंसी देकर लखनऊ भेजा गया. करीब 68 साल के बुजुर्ग को नाका पुलिस ने फेक करेंसी के साथ पकड़ लिया. उम्रदराज और बाईपास सर्जरी होने के चलते पुलिस उससे पूछताछ भी नहीं कर सकी. जिसके चलते फेक करेंसी का कारोबार करने वाले असली खिलाडि़यों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी.

कोट-

नशीले पदार्थ के बाद अब फेक करेंसी और आ‌र्म्स सप्लाई के लिए देखा जा रहा है कि शातिर बुजुर्ग को इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे दो से तीन मामले प्रकाश में भी आए हैं. पुलिस उम्रदराज और बुजुर्गो पर शक नहीं करती है. पुलिस से बचने के लिए अपराधी उन्हें कैरियर के रूप में टारगेट कर रहे हैं.

विकास चंद्र त्रिपाठी, एसपी पश्चिम