क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का तोहफा जल्द देने की मूड में है. इसे लेकर सरकार ने कवायद शुरू कर दी है. वित्त और योजना विभाग ने आयोग की सिफारिश लागू करने के लिए फिटमेंट कमेटी के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. मुख्यमंत्री रघुवर दास की सहमति मिलने के बाद कमेटी के अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति की जाएगी. सबकुछ ठीक रहा तो कर्मियों को जनवरी 2016 से ही इसका लाभ मिलेगा.

पदों में नहीं है समानता

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के पद संरचना में समानता नहीं है. केंद्र में कई ऐसे पद हैं जो राज्य में नहीं है. ऐसे में इन पदों के लिए वेतन निर्धारण करने के लिए राज्य सरकार को अपने स्तर पर निर्णय लेना है. इसके अलावा वेतन निर्धारण के सिलसिले में झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ, झारखंड सचिवालय सेवा संघ सहित विभिन्न कर्मचारी संघ की कई आपत्तियां और सुझाव हैं. फिटमेंट कमेटी इन पर विचार करेगी.

तीन साल विलंब से हुआ था लागू

छठे वेतन आयोग की सिफारिश राज्य में लागू करने में तीन साल का वक्त लगा था. इस बार ऐसा नहीं होने की संभावना है. इसकी वजह छठे वेतन आयोग की तरह सांतवे वेतन आयोग में पेंच कम है. सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने पर झारखंड सरकार को 2819 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा. वित्त और योजना विभाग के प्रारंभिक अनुमान में यह आंकड़ा सामने आया है.

वेतन पर 8199 करोड़ खर्च

फिलहाल झारखंड में 1062232 सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं. जिनके वेतन पर हर महीना 8199 करोड़ रुपये खर्च होता है. पेंशन मद में सरकार प्रत्येक महीने 3969 करोड़ रुपये भुगतान करती है. सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने पर वेतन मद में 1866 करोड़ रुपये और पेंशन पर 953 करोड़ रुपये अतिरिक्त बोझ राज्य सरकार पर आने की संभावना है.