फ्लैग : नगर निगम का चार साल से बंद पड़े पंम्पिंग स्टेशन पर संसाधनों की बर्बादी

- चोरों ने कुओं पर लगे महंगे जाल काटे, शराबियों, जुआरियों ने बनाया अड्डा

- सिर्फ तीन मोटरों के खराब होने से बंद कर दिया गया था प्लांट

BAREILLY:

नगर निगम पैसों और अपने संसाधनों को कैसे बर्बाद करता है, यह देखना है तो सिटी शमशान भूमि के सामने बने नगर निगम के सीवर पंम्पिंग स्टेशन चले आइए. 1973 में 5 करोड़ की लागत से बना इस पंम्पिंग स्टेशन को चार साल पहले 2014 में सिर्फ इसलिए बंद कर दिया गया था, क्याेंकि इसकी तीन मोटरें बार-बारी से खराब हो गई थीं. यहां काम करने वाले पंप ऑपरेटर बलबीर का कहना है कि मात्र 25 से 30 हजार रुपए खर्च कर इसे चालू रखा जा सकता था. लेकिन नगर निगम न तो इसे चालू हालत में रख सका और न ही अपनी संपत्ति की सुरक्षा कर पा रहा है. यहां लगे कीमती सामान पर ही चोरों ने हाथ साफ करना शुरू कर दिया है. कभी पांच गांवों के सैकड़ों किसानों की सिंचाई की जरूरत पूरी करने वाला यह पंपिंग स्टेशन अब यह जुआरियों और शराबियों का अड्डा बन चुका है.

जाल व अन्य सामान चोरी

करीब 3 बीघा जमीन में बने खड़े इस पंप के कुओं पर लगे 50 हजार की कीमत वाले जाल चोर चुरा ले गए. इसके अलावा दूसरे अन्य सामान पर भी चोरों ने हाथ साफ कर दिया है. लेकिन नगर निगम ने इसका कोई इंतजाम नही किया.

सिंचाई के लिए बनाया था पंप

नगर निगम के मुताबिक शहर की सफाई और खेतों की सिंचाई के लिए बनाए गए इस पंपिंग स्टेशन से पाइप लाइन के जरिए किसानों को पानी दिया जाता था. पंपिंग स्टेशन चलाने के लिए नगर निगम ने पास के ही गांव के बलबीर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी. बलबीर ही इसकी देखरेख करते थे.

1973 में बना था पांच करोड़ का

बलबीर ने बताया कि पंप को बनाने में करीब 5 करोड़ रुपए की लागत आई थी. हालांकि नगर निगम के अफसर इसकी सही-सही लागत नहीं बता पाए. उसके पास इसका कोई डाटा ही नहीं है.

पांच गांवों को मिलता था पानी

बलबीर ने बताया कि जब यह पंप शुरू हुआ था, तब इससे तल्फी सराय, ऊंचा गांव, सर्रईया, बैनीपुर और जसौली गांव के किसानों को पानी दिया जाता था. इन पांचों गांवों के खेतों से होकर पाइपलाइन गुजरती थी.

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नया प्लांट बनेगा

इस प्लांट की जगह अब सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा, जिससे शहर के सीवर की पानी की समस्या को निपटाया जा सके. इस बार लगने वाला पंप थोड़ा एडवांस होगा. इसमें पानी का ट्रीटमेंट भी हो सकेगा और साफा पानी ही नदी में गिरया जाएगा. नए प्लांट के लिए पुराने प्लांट की जगह को चिन्हित किया गया है. जल्द ही काम शुरू होने की संभावना है.

पार्केश्वर, एई, जलकल विभाग

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किसानाें की बात

जब यह प्लांट चलता था तो हमें पानी की कोई समस्या नहीं थी. लेकिन जब से यह बंद हुआ है तब से खेत की सिंचाई करने में बहुत दिक्कत आती है.

मेवाराम, किसान

जब इस प्लांट का पानी मिलता था. तो खेती अच्छी होती थी. लेकिन पिछले चार साल से तो सिंचाई के लिए पानी बड़ी समस्या है. अब किसी के ट्यबवेल से पानी लेने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं.

जितेंद्र, किसान

यह प्लांट बहुत अच्छा चलता था, लेकिन पिछले करीब 4 साल से यह सिर्फ मोटर खराब होने की वजह से बंद कर दिया. तब से अभी तक यहां पर कोई सुविधा नहीं है.

बलबीर सिंह, किसान