- राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने निरीक्षण के दौरान दिए जांच के आदेश

- डॉ. विशेष गुप्ता बोले, बच्चों को ईसाई धर्म की ही दी जा रही जानकारी

- डीपीओ से बच्चों का रिकॉर्ड तलब कर जांच रिपोर्ट भेजने को कहा

bareilly@inext.co.in

BAREILLY: वॉर्न बेबी फोल्ड अनाथालय पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता ने यहां रहने वाले बच्चों का धर्मातरण कराने का संदेह जताया है. उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को संस्था में रहने वाले सभी बच्चों का डाटा तलब कर मामले की जांच के निर्देश दिए है. इसके साथ ही उन्होंने आर्य समाज संस्था की ओर संचालित अनाथालय में भारी अव्यवस्थाओं के कारण प्रबंधन कमेटी पर नाराजगी जताई है. संस्था को चेतावनी पत्र जारी कर एक माह में सुधार करने को कहा है.

विभिन्न धर्म के बच्चों को बताया ईसाई

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता गुरुवार को एक दिवसीय दौरे पर आए. उन्होंने वार्न बेबी फोल्ड अनाथालय का निरीक्षण किया. यहां उन्होंने बच्चों से मुलाकात की. अधीक्षिका पी एडमन से बच्चों के बारे में जानकारी हासिल की. सामने आया कि यहां रहने वाले बच्चे विभिन्न धर्मो के हैं लेकिन अधीक्षिका उन्हें ईसाई धर्म का बता रहीं थीं. इनमें वह बच्चे भी शामिल थे जो गरीब परिवार से होने के कारण पढ़ाई-लिखाई के लिए यहां रह रहे थे. अध्यक्ष ने जब बच्चों ने स्कूल में सिखाई जाने वाली प्रार्थना सुनाने को कहा तो सभी बच्चे प्रभु यीशु की प्रार्थना सुनाने लगे. इस पर उन्होंने अधीक्षिका से पूछा कि क्या यहां बच्चों को देश का राष्ट्रगीत नहीं सिखाया जाता तो अधीक्षिका बगले झांकने लगीं. इसके बाद उन्होंने अधीक्षिका से बच्चों के माता-पिता के बारे में जानकारी चाही तो उस पर भी गोलमोल जवाब देने लगीं.

बच्चों का किया जा रहा ब्रेनवॉश

आयोग के अध्यक्ष को बच्चों का धर्म परिवर्तन कराने का संदेह हुआ. उन्होंने टिप्पणी की कि संदेह है कि यहां रहने वाले बच्चों का बचपन से ही ईसाई धर्म के प्रति ब्रेनवॉश किया जाता है. जिला प्रोबेशन अधिकारी को सभी बच्चों का रिकार्ड तलब कर मामले की जांच के निर्देश दिए.

लड़कियों को बाहर ले जाने के लगे थे आरोप

यह अनाथालय ईसाई धर्म के लोगों की ओर से संचालित है. इसमें लगभग 50 बच्चे रह रहे हैं.कुछ दिन पहले यहां के व्यस्क बालकों ने आरोप लगाया था कि अधीक्षिका के पति लड़कियों के कमरों की ओर बिना किसी रोक-टोक के जाते आते हैं. अधीक्षिका भी लड़कियों को बाहर ले जाती हैं.