-अहम विभाग छीने जाने से खफा शिवपाल बोले

- लोक निर्माण और सिंचाई विभाग छिनने से बढ़ी रार

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LUCKNOW(14 Sept): समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता शिवपाल सिंह यादव 'अपनों' से नाराज चल रहे हैं. मंगलवार को पार्टी संगठन में कद बढ़ने के बाद अचानक विभागों को कतरने का फैसला शिवपाल को रास नहीं आया है. नतीजतन उन्होंने अघोषित रूप से अपनी ही सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया लेकिन चंद घंटों के भीतर की खुद ही डैमेज कंट्रोल की पहल भी कर दी. बुधवार को दिल्ली रवाना होने से पहले शिवपाल ने ऐलान कर दिया कि सपा सुप्रीमों का हर फैसला उनको मंजूर होगा. हालांकि, मंगलवार सुबह से शुरू हुई पार्टी की अंदरूनी रार चौबीस घंटे बीतने के बाद भी किसी अहम नतीजे तक नहीं पहुंच सकी. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव भी इस 'पावर पॉलिटिक्स' की तोड़ निकालने में जुटे रहे.

सिंघल की विदाई नहीं रास आई

शिवपाल के बेहद करीबी माने जाने वाले मुख्य सचिव दीपक सिंघल की विदाई पूरे विवाद की जड़ बताई जा रही है. इससे पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो ताकतवर मंत्रियों गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया तो पार्टी में हड़कंप मच गया. बता दें कि गायत्री प्रजापति सपा प्रमुख के तो राजकिशोर सिंह शिवपाल के खास माने जाते है. सूत्रों के मुताबिक दोनों को हटाने का फैसला मुख्यमंत्री ने बिना किसी की सलाह के लिया था. मुलायम ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में खुद इसकी पुष्टि की थी. इसके अगले दिन सुबह अचानक मुख्य सचिव दीपक सिंघल की विदाई से घर की अंदरूनी लड़ाई सतह पर आ गयी. शिवपाल ने सैफई में डेरा डाल दिया तो उनके समर्थक जमा होने शुरू हो गये. बुधवार सुबह तक राज्य सरकार के भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे. मुलायम ने इसके बाद शिवपाल को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया तो इसके जवाब में अखिलेश ने शिवपाल के अहम विभाग छीन कर उन्हें समाज कल्याण तक सीमित कर दिया.

पार्टी प्रमुख का हर फैसला मंजूर

अखिलेश के फैसलों से नाराज शिवपाल यादव ने मंगलवार को सैफई में मीडिया से दूरी बनाए रखी. इस बीच यह सूचना भी आई कि शिवपाल ने अखिलेश के साथ काम नहीं करने का बयान दिया है हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी. इसके बाद शिवपाल के समर्थकों का जमावड़ा लखनऊ और सैफई में लगने लगा. बुधवार सुबह सैफई में शिवपाल मीडिया के सामने आए, लेकिन इस बार उनके तेवर बदले हुए थे. उन्होंने साफ किया कि परिवार में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है. पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव का हर फैसला उन्हें मान्य है. मुलायम उन्हें जो भी निर्देश देंगे, वे उसका पालन करेंगे. इसके बाद वे अपने पुत्र आदित्य यादव के साथ मुलायम से मिलने दिल्ली रवाना हो गये. चर्चा यह भी रही कि उन्होंने और आदित्य यादव ने मुलायम को अपना इस्तीफा भी भ्ोजा है.

लेकिन संगठन में ताकतवर

बीते 48 घंटों के भीतर यूपी की सियासत से लेकर सरकार तक मची उथल-पुथल में शिवपाल के हिस्से में केवल प्रदेश अध्यक्ष का पद आया हालांकि जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे अहम जिम्मेदारी माना जा रहा है. बतौर प्रदेश अध्यक्ष अब टिकट बंटवारे से लेकर संगठन के हर अहम फैसले शिवपाल ले सकेंगे. चुनाव में भी पार्टी की दिशा तय करने का अधिकार भी उनके पास ही रहेगा. प्रदेश अध्यक्ष होने की वजह से अखिलेश को भी उनकी हर बात माननी होगी.

इन विभागों को छीना

शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के चंद घंटों के भीतर ही मुख्यमंत्री ने शिवपाल यादव के तमाम विभाग वापस ले लिए. सबसे अहम लोक निर्माण विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा. सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण अवधेश प्रसाद को सौंप दिया गया तो राजस्व, अभाव, सहायता एवं पुनर्वासन तथा लोक सेवा प्रबंधन विभाग एवं सहकारिता विभाग बलराम यादव को. शिवपाल को केवल भूमि विकास एवं जल संसाधन, परती भूमि विकास के अलावा समाज कल्याण विभाग का अतिरिक्त कार्यभार देकर हाशिए पर डाल ि1दया गया.

पहले भी नाराज रहे शिवपाल

शिवपाल यादव की नाराजगी का यह पहला मामला नहीं है. कुछ दिन पहले उन्होंने इटावा में खुलेआम इस्तीफा देने की धमकी देकर पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया था. मुलायम को खुद उनके बचाव तक में उतरना पड़ा था. कौमी एकता दल के विलय को लेकर भी शिवपाल अखिलेश के निशाने पर रहे हालांकि उन्होंने इसे मुलायम का फैसला बताकर खुद को किनारे कर लिया. राजधानी में प्रोफेसर रामगोपाल यादव के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में शिवपाल की नाराजगी की झलक भी दिखी. इससे पहले मथुरा के जवाहरबाग कांड में विपक्ष के निशाने पर शिवपाल आए तो पार्टी के किसी बड़े नेता ने खुलकर उनका साथ नहीं दिया. वहीं सपा को बहुमत मिलने के बाद अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले को लेकर भी शिवपाल की नाराजगी की चर्चा फैली थी.