उत्तरप्रदेश ने उत्तराखंड को हरिद्वार का अलकनंदा होटल देने से किया इनकार

-लखनऊ में हुई पर्यटन विभाग की परिसंपत्तियों को लेकर दोनों राज्यों की बैठक

DEHRADUN: उत्तरप्रदेश के साथ परिसंपत्ति बंटवारे को लेकर उत्तराखंड को झटका लगा है. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने साफ कर दिया है कि हरिद्वार स्थित अलकनंदा होटल उत्तर प्रदेश पर्यटन की आय का एक प्रमुख स्रोत है, लिहाजा यह होटल उत्तराखंड को नहीं दिया जाएगा. यह स्थिति तब है जब दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई बैठक में इसे उत्तराखंड को देने पर सहमति बन चुकी थी. अब उत्तराखंड पर्यटन विभाग कोर्ट में चल रहे इस मामले में पुरजोर पैरवी की तैयारी कर रहा है.

दोनों सरकारों में बनी थी सहमती

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच इस समय परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है. दोनों प्रदेशों में भाजपा की सरकार होने के कारण यह उम्मीद जगी थी कि परिसंपत्ति बंटवारे के अब विवाद समाप्त हो जाएंगे और दोनों राज्य मिलजुल कर इसका हल निकालेंगे. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के बीच गत क्0 अप्रैल को परिसंपत्ति बंटवारे को लेकर चर्चा हुई थी. इस बातचीत में हरिद्वार स्थित अलकनंदा होटल को उत्तराखंड को दिए जाने को सहमति बनी थी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को आपस में बैठकर इसका हल निकालने को कहा था. इसके बाद यह सहमति बनी. बकायदा मुख्यमंत्रियों की बैठक के जारी कार्यवृत्त में भी इसका जिक्र है. इसके कुछ समय बाद उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. इस पर फ्0 जून को उत्तर प्रदेश में एक अन्य पत्रावली चली, जिसमें अलकनंदा होटल को उत्तराखंड को देने से इनकार कर दिया गया.

कोर्ट में जाएगा मामला

बीते सप्ताह पर्यटन विभाग के परिसंपत्ति बंटवारे को लेकर लखनऊ में एक बैठक हुई. प्रदेश की ओर से इस बैठक में अपर सचिव पर्यटन सविन बंसल ने शिरकत की. बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश अलकनंदा होटल को अपने पास ही रखेगा. सचिव पर्यटन मीनाक्षी सुंदरम ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि अब इस मामले को कोर्ट में पुरजोर तरीके से लड़ा जाएगा.

बंटवारे को लेकर सुस्त रफ्तार

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का मामला अब सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. अप्रैल में जब दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई थी, उस समय यह निर्णय लिया गया कि डेढ़ माह के भीतर इनका निस्तारण कर लिया जाएगा. इसके लिए कुछ समय तक शासन ने रफ्तार भी पकड़ी. मुख्य सचिव ने खुद समीक्षा बैठकें की. बीते माह इसमें मुख्य सचिव स्तर की बैठक होनी थी. यह बैठक अभी तक नहीं हो पाई है. जिस तरह से उत्तर प्रदेश ने पर्यटन की परिसंपत्तियों से हाथ पीछे खींचा है, उससे माना जा रहा है कि बंटवारे की यह राह इतनी आसान नहीं रहेगी.