-पहले लगती थी वीआईपी नम्बरों के लिए होड़

- नीलामी प्रक्रिया शुरू होते ही घटी क्रेज

द्दह्रक्त्रन्य॥क्कक्त्र: परिवहन विभाग की वीआईपी नम्बरों से कमाई करने की योजना फेल होती नजर आ रही है। हाल ही में पूरे देश में वीआईपी नम्बरों को नीलामी करने का नियम लागू किया गया है। जिससे राजस्व में और वृद्धि हो सके। कई बड़े शहरों में वीआईपी नम्बरों की नीलामी से अच्छी खासी कमाई भी हुई है। लेकिन ये नीलामी प्रकिया गोरखपुराइट्स को जरा भी रास नहीं आई। लिहाजा गोरखपुराइट्स के इंट्रेस्ट नहीं दिखाने की वजह से पहली ही नीलामी फेल साबित हुई। जिससे एक बार फिर से नीलामी शुरू की गई है। इसके बाद भी खरीदार नहीं मिलने पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर नम्बर वितरित किया जाएगा। जिस किसी ने भी नीलामी प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन कराया है उसे उस नम्बर के फिक्स रेट पर ही वीआईपी नम्बर मिल जाएगा।

वीआईपी नम्बरों को चार भाग में किया डिवाइड

एक समय हुआ करता था कि वीआईपी नम्बरों को पाने के लिए आरटीओ दफ्तर में होड़ लगी रहती थी। इस होड़ की वजह से अफसर भी परेशान रहते थे। टेंशन को कम करने के लिए 346 वीआईपी नम्बरों को पहले तो ऑनलाइन कर दिया गया। इस प्रक्रिया में वीआईपी नम्बरों को चार भाग में डिवाइड कर उनका फिक्स रेट तय किया गया। इसके बाद जो भी परिवहन विभाग की वेबसाइट पर पहले नम्बर बुक कराएगा उसे नम्बर अलॉट हो जाता था।

गोरखपुराइट्स को नहीं रास आई नीलामी

वीआईपी नम्बरों के लिए लोगों का बढ़ता क्रेज देखकर उनसे कमाई के लिए परिवहन विभाग द्वारा शुरू की गई स्कीम गोरखपुर में फेल साबित हो रही है। नीलामी प्रक्रिया पूरी हो सके इसके लिए एक नम्बर पर कम से तीन लोगों को बोली लगानी होगी। इसके बाद जिसकी बोली ज्यादा होगी उसे नम्बर अलॉट कर दिया जाएगा। गोरखपुर में 2 मई से नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई। जो तीन दिन तक चली लेकिन एक्का-दुक्का नम्बरों पर ही केवल गोरखपुराइट्स ने इंट्रेस्ट दिखाया, लेकिन बोली लगाने वालों की संख्या केवल एक थी। इस लिए पहली नीलामी रद्द कर एक बार फिर से प्रक्रिया शुरू की गई है।

नहीं दिखा टशन

नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अधिकारियों का मानना था कि इससे वीआईपी नम्बरों को पाने के लिए लोग ज्यादा से ज्यादा बोली लगाएंगे। जिससे उनके राजस्व में वृद्धि होगी। कुछ खास नम्बरों की तो लाखों रुपए तक कीमत बढ़ने की आंशका थी। लेकिन ऐसा कोई टशन नहीं देखने को मिला और आगे भी यही हाल रहा तो सभी वीआईपी नम्बरों को फिक्स रेट पर ही वितरीत करना पड़ेगा।

कामर्शिलय नम्बरों का भी यही हाल

नॉन कामर्शियल की तरह ही कामर्शियल फैंसी नम्बरों के लिए भी ये व्यवस्था लागू की गई थी। इसके लिए भी लोग इंट्रेस्ट नहीं दिखा रहे हैं। जिससे इनकी भी बोली नहीं लग पा रही है।

चार कैटगरी में डिवाइड वीआईपी नम्बर

क्लॉस रेट

ए क्लॉस- 15000

बी क्लॉस- 7500

सी क्लॉस- 6000

डी क्लॉस- 3000

वर्जन-

नीलामी में बोली लगाने वालों की संख्या तीन से कम थी। इसलिए दोबारा नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके बाद पहले आओ पहले पाओ के आधार पर नम्बर दे दिया जाएगा।

श्याम लाल, आरटीओ प्रशासन