- हीमोफीलिया फैक्टर-8 व 9 की दवाएं आउट ऑफ स्टॉक

- बाकी दवाओं का भी स्टॉक काफी कम

- दून में हीमोफीलिया के कुल 125 मरीज

देहरादून, शासन की ओर से दवाइयों की कीमत बढ़ाने की अनुमति न मिलने के कारण दून हॉस्पिटल में हीमोफीलिया की दवाइयों का जबरदस्त टोटा है. कुछ दवाएं तो पूरी तरह खत्म हैं, जबकि कुछ दवाओं का काफी स्टॉक हॉस्पिटल में बचा है. हीमोफीलिया में सबसे ज्यादा दी जाने वाली फैक्टर-8 की दवा चार दिन से आउट ऑफ स्टॉक है, जबकि फैक्टर-9 की दवा थर्सडे को खत्म हो गई. हॉस्पिटल मैनेजमेंट को अब तक दवाएं परचेज करने की परमिशन नहीं मिला है.

महंगा है हीमोफीलिया का इलाज

हीमोफीलिया एक जेनेटिकल डिजीज है, इसमें पेशेंट को चोट लगने पर ब्लड की क्लॉटिंग नहीं हो पाती. खून बहता रहता है, जिसे बंद करने के लिए दवाएं लेनी जरूरी होती हैं. शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लगने पर ब्लीडिंग शुरू हो जाए तो मरीज को कम से कम 20 हजार रुपए की दवा लेनी होती है. सरकारी हॉस्पिटल में ये फ्री मिलती है.

फैक्टर-8 व 9 के सबसे ज्यादा पेशेंट

हीमोफीलिया के मरीजों को सिंप्टम्पस के आधार पर फैक्टर-1 से 13 तक में विभाजित किया जाता है. औसतन 70 परसेंट मरीज फैक्टर-8 के और 25 परसेंट फैक्टर-9 के होते हैं. दून में 90 मरीज फैक्टर-8 और 30 फैक्टर-9 के हैं. अन्य फैक्टर के मरीजों की संख्या 5 है.

शासन से नहीं मिल रही परमिशन

हीमोफीलिया की दवा की लोकल परचेज के लिए दून हॉस्पिटल की ओर से शासन के पास प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन फिलहाल इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है. ऐसी स्थिति में फिलहाल यदि हीमोफीलिया के किसी मरीज को हॉस्पिटल जाना पड़े तो वहां उसे दवा नहीं मिल पाएगी. हीमोफीलिया एसोसिएशन के सचिव दीपक सिंघल ने जल्द दवा उपलब्ध कराने की मांग की है.

हिपेटाइटिस जांच किट भी नहीं

हॉस्पिटल में इन दिनों हिपेटाइटिस बी और सी की जांच की किट भी नहीं है. इस जांच को करवाने के लिए मरीजों को निजी लैब में जाना पड़ रहा है. जहां मरीजों से 300 से लेकर 1200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. जबकि हेपेटाइटिस जांच किट की कीमत मात्र 80 रुपये है.

आंखों के लैंस भी खत्म

इस बीच दून हॉस्पिटल में केन्द्र सरकार की अंधता निवारण योजना भी ठप पड़ गई है. इस योजना के तहत आंखों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने के बाद आंखों में लगने वाले लैंस मुफ्त दिये जाते हैं. लेकिन पिछले कई दिनों से दून हॉस्पिटल में लैंस नहीं हैं. बाहर से 700 रुपये में लैंस खरीदने पड़ रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार मुफ्त लैंस की सुविधा गांधी आई हॉस्पिटल में दी जा रही है.