-पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा पर गृह विभाग ने डीएसपी प्राण रंजन कुमार से मांगा जवाब

-15 दिनों के भीतर अपना अपना पक्ष रखने का निर्देश

रांची : कोयला माफिया को बचाने में फंसे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के डीएसपी प्राण रंजन कुमार को अनुशासनिक कार्रवाई के पूर्व शो-कॉज किया गया है. पुलिस मुख्यालय ने डीएसपी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी, जिसपर गृह विभाग ने डीएसपी प्राण रंजन कुमार से उनका पक्ष मांगा है. यह भी निर्देश दिया गया है कि वे 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष गृह विभाग को सौंप दें ताकि उसपर आगे का निर्णय लिया जा सके.

गौरतलब है कि प्राण रंजन कुमार वर्ष 2008 में रामगढ़ के गोला थाना के थानेदार थे. तब बरलंगा स्टेशन से गुजरने वाली मालवाहक ट्रेनों से गरीब मजदूरों को प्रलोभन देकर कोयला उतरवाकर कोयले को ट्रैक्टर व साइकिल से ढुलवाकर गोला थाना क्षेत्र से सटे झालदा थाना क्षेत्र के डाकागढ़ा में भेजा जाता था. यहां से कोयले की तस्करी होती थी, जिसे पुलिस ने पकड़ा था. 25 फरवरी 2008 को दारोगा मानसिद्ध तिर्की के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इसमें 15 आरोपित किए गए थे. डीएसपी प्राण रंजन कुमार पर आरोप है कि उन्होंने पांच अभियुक्तों के चार्जशीटेड और विभिन्न जिलों में कांड दर्ज होने के बावजूद उन्हें असत्यापित बताते हुए चार्जशीट दाखिल किया था. जबकि, पांचों अभियुक्त पूरे क्षेत्र में कोयला माफिया के रूप में प्रसिद्ध हैं.

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आइजी-डीआइजी के पर्यवेक्षण में भी दोषी पाए जा चुके हैं डीएसपी

डीएसपी प्राण रंजन कुमार हजारीबाग के तत्कालीन डीआइजी व बोकारो जोन के आइजी की पर्यवेक्षण रिपोर्ट में भी दोषी पाए जा चुके हैं. वरिष्ठ अधिकारियों के पर्यवेक्षण के बाद ही पुलिस मुख्यालय ने सरकार से कार्रवाई की अनुशंसा की है.