- सप्तक्रांति, लखनऊ मेल समेत अन्य ट्रेनों का संचालन ठप

BAREILLY:

बिलपुर स्टेशन पर मंडे की सुबह 4.30 बजे अचानक सिग्नल पैनल ने काम करना बंद कर दिया. जिसके कारण अप-डाउन की गाडि़यां रुक गई. स्टेशन मास्टर ने मामले की रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना दी. बरेली से टेक्निकल टीम 6.00 बजे पहुंची. फाल्ट खोजने में काफी समय लग गया. मंडल ऑफिस निर्देश पर ट्रेनों को स्टेशन मास्टर मेमो देकर चलाते रहे. 6.30 बजे कहीं पैनल ठीक किया जा सका.

ढाई घंटे बाद दूर हुई प्रॉब्लम

इस दौरान नौचंदी एक्सप्रेस, सप्तक्रांति, लखनऊ मेल, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, सद्भावना एक्सप्रेस, दानापुर-आनंद विहार एक्सप्रेस, के अलावा पांच मालगाडि़यों को रोककर मेमो देकर पास कराया गया. बता दें, बिलपुर में सिंगल पैनल दो सप्ताह में तीसरी बार प्रभावित हुआ है. पहले तेज आंधी बारिश के कारण पैनल ने काम करना बंद कर दिया था. फिर, तीन दिन बाद रसुइया से बिलपुर तक सिग्नल फेल हुए थे. तब पांच घंटे में टेक्निकल टीम ने फाल्ट ठीक किया था. अब फिर, बिलपुर में सुबह पैनल खराब होने से अप-डाउन की ट्रेनें करीब ढाई घंटे तक प्रभावित रहीं.

आए दिन खराब हो रहे सिग्नल पैनल

एक हफ्ते पहले भी सिग्नल पैनल में खराबी के मामले सामने आ गए हैं. 14 मई को रसुइया रेलवे स्टेशन का सिग्नल पैनल खराब हो गया था. वहीं 16 मई को एक साथ तीन रेलवे स्टेशनों का सिग्नल पैनल खराब होने से ट्रेनों को घंटों रोकना पड़ा था. रात 8 बजे से सुबह 10 बजे तक सिग्नल पैनल सही नहीं हो सका था. रसुइया, बिलपुर और पीताम्बरपुर रेलवे स्टेशन के सिग्नल पैनल खराब हुए थे.

होता है पैनल का काम

असल में किसी ट्रेन को रुकना है, धीरे चलना है या तेज गति से पार होना है, इसका निर्णय सिग्नल से होता है. सिग्नल किस प्रकार का हो, ये छोटे स्टेशन पर मास्टर कार्यालय से व मंडल मुख्यालय सहित बडे़ स्टेशन पर टॉवर से होता है. टॉवर से जुडे़ तार सिग्नल की लाइट को हरा, पीला या लाल करते हैं. ऐसे में बीच का तार खराब हो जाए तो पूर्व का सिग्नल जलता रहेगा. जबकि टॉवर पर बैठा कर्मचारी या स्टेशन मास्टर सोचेगा की उसने सही सिग्नल दिया है.