पिता बोले, अब ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाए, यही हमारा सपना

कोच अनंत शिवेन ने बताया कि शार्दुल डायरी में मेनटेन करता है दिनचर्या

शार्दुल के पिता और कोच से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने की विशेष बातचीत

Meerut. इंडोनेशिया में चल रहे एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाले 15 साल के शार्दुल विहान ने देश के साथ-साथ मेरठ का नाम भी रोशन कर दिया. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट से बातचीत में शार्दुल के पिता दीपक विहान ने बताया कि शार्दुल ने इस मेडल के लिए एक लंबा सफर तय किया है लेकिन शार्दुल समेत पूरे परिवार का सपना अब ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाना है.

कोच ने वापस भेज दिया

शार्दुल के पिता दीपक ने बताया कि शार्दुल ने इसके पहले क्रिकेट और बैडमिंटन की भी ट्रेनिंग ली थी, लेकिन उसका मन उस खेल में नहीं लगा दीपक विहान बताते हैं कि शार्दुल करीब 8 साल का हो गया था. एक शाम उनसे मुझसे कहाकि पापा मुझे शॉटगन खेलना है. मुझे लगा कि खुद के सपने का साकार करने का वक्त आ गया है. मैंने तुरंत उसका स्टेडियम में एडमिशन करा दिया. इसके बाद जो पूरे दिन ट्रेनिंग, रनिंग, जिम और मेडल लाने का सिलसिला शुरू हुआ वह आज तक चल रहा है. आज जब शार्दुल सिल्वर मेडल जीता तो मुझे लगा कि बेटे ने सपने को साकार करना शुरू कर दिया है. आज इंडिया लेवल पर शायद ही कोई ऐसा मेडल हो, जो शार्दुल ने ना जीता हो.

ज्वाइंट फैमिली की देन

दीपक विहान बताते हैं कि मेरा छोटा भाई मनोज और हमारी फैमिली एक साथ रहते हैं. परिवार तीन बच्चे शार्दुल, बेटी खुशबू और अनंत हैं. अगर हमारी फैमिली ज्वाइंट न होती तो आज ये मेडल भी नहीं होता. मुझे बिजनेस के चक्कर में समय नहीं मिलता लेकिन बाकी पूरा परिवार शार्दुल की तरह मेहनत करता है. छोटा भाई मनोज तो शार्दुल के साथ पिछले 8 साल से परछाई की तरह रह रहा है. इंडोनेशिया में भी वह शार्दुल की ताकत बनकर उसके साथ था.

हार नहीं मानी

शार्दुल के पिता दीपक विहान और कोच अनंत शिवेन बताते हैं कि 2012 में शार्दुल साढ़े 9 साल था. उसे दिल्ली नॉर्थ जोन खेलने जाना था. रास्ते में शार्दुल का हाथ की उंगली गेट में भीच गई और पूरी तरह नीली पड़ गई. मैंने कहा कि रहने दे फिर ट्राई करेंगे लेकिन शार्दुल बोला कि नहीं अभी नहीं तो कभी नहीं. शूटिंग के खेल में उंगली में चोट लगी हो तो समझिए कि आपका खेल खत्म लेकिन शार्दुल ने जूनियर सीनियर में चार गोल्ड झटके.

दो महीने सिफर् अप-डाउन

कैलाश प्रकाश स्टेडियम में 8 साल के शार्दुल के दो कोच रहे. एक तो वेदपाल सिंह और दूसरा उनका बेटा अनंत शिवेन प्रताप सिंह जो खुद शॉटगन से डबल ट्रैप में खेलते हैं. वेदपाल सिंह बताते हैं कि जब करीब 8 साल पहले शार्दुल उनके पास आया शॉटगन के करीब साढ़े पांच किलो वेट और फायर के बाद गन का झटका झेलने के हिसाब से वह बहुत छोटा और वजन में हल्का था. इसलिए मैंने उसे 2 महीने तक केवल शॉटगन के साथ अप-डाउन की प्रैक्टिस कराई, जिससे उसका स्टेमिना बन सके. शार्दुल के दूसरे कोच अनंत शिवेन बताते हैं कि मैंने शार्दुल को एक डायरी मेनटेन करनी सिखाई, जिसमें लिखा होता था कि उसे रोज क्या करना है और कैसे. उसने हमेशा उस डायरी को मेनटेन किया. शार्दुल उम्र के हिसाब से बहुत ही गंभीर बच्चा था. कम उम्र में अपने लक्ष्य के लिए इतना डेडिकेटेड शूटर मैंने आज तक नहीं देखा. कंपटीशन के दौरान अपने निशानों से शार्दुल ने बड़े-बड़ों को चौंका दिया.

जा रहा साउथ कोरिया

चाचा मनोज विहान ने बताया कि शार्दुल इंडोनेशिया के बाद अब व‌र्ल्ड चैंपियनशिप खेलने साउथ कोरिया जा रहा है. यह एक तरह का ओलंपिक ही होता है, जो 4 साल में एक बार होता है.

बोर्ड की परीक्षा देगा शार्दुल

मेरठ के मोदीपुरम के दयावती मोदी एकेडमी में 10वीं के छात्र शार्दुल मेरठ के ही सिवाया गांव के रहने वाले हैं. इस साल उसे बोर्ड परीक्षाएं देनी हैं. वह नेशनल लेवल में कई अनुभवी और दिग्गज शूटर्स को मात दे चुके हैं. शार्दुल पिछले साल मॉस्को में जूनियर व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में छठे स्थान पर रहे और जूनियर लेवल के डबल ट्रैप का फाइनल भी जीत चुके हैं.