40 फीसदी आबादी बुनियादी जरूरतों से महरूम है मेरठ में

100 मेगावाट बिजली की कमी है रोजाना शहरवासियों को

30 फीसदी से अधिक आबादी पेय जलापूर्ति के लिए है परेशान

Meerut. जनसंख्या वृद्धि की दर यही रही तो आने वाले दिनों में बुनियादी जरूरत और संसाधनों के लिए भी मेरठवासियों को संघर्ष करना होगा. इसकी बानगी इतनी भर है कि मौजूदा समय में करीब 100 मेगावाट बिजली की आपूर्ति डिमांड के हिसाब से कम है, जिसे कटौती करके पूरा किया जा रहा है. पानी के लिए 30 फीसदी आबादी घरों से बाहर भटक रही है तो वहीं 40 फीसदी आबादी को बुनियादी जरूरतों से जूझना पड़ा रहा है.

सिकुड़ रहे हैं घरौंदे

मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव राजकुमार का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं. संसाधन दम तोड़ रहे हैं तो वहीं बुनियादी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने बताया मास्टर प्लान-2021 की प्लानिंग के तहत ज्यादातर सड़कों, पार्को, आवासीय कालोनियों को विकसित कर दिया गया है किंतु यह नाकाफी साबित हो रहे हैं. खासकर भीड़ का दबाव सड़कों पर दिन-ब-दिन बढ़ रहा है. विभिन्न आवासीय योजनाओं के बावजूद घरौंदे सिकुड़ रहे हैं.

बिजली छुड़ा रही पसीना

मेरठ के 2.75 लाख बिजली उपभोक्ता हैं. 1900 मिलियन यूनिट सालाना की डिमांड है जबकि उपभोक्ताओं को 1560 मिलियन यूनिट बिजली ही सालाना मिल पा रही है. 430 मेगावाट प्रतिदिन बिजली की आपूर्ति मेरठ में हो रही है जबकि डिमांड 530 मेगावाट की है. डिमांड और सप्लाई में 100 मेगावाट का गैप मेरठवासियों को हलकान कर रहा है.

30 फीसदी जनता प्यासी

जलापूर्ति के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 30 फीसदी आबादी जलापूर्ति के लिए भटक रही है. जीएम जलकल आरपीएस सलूजा ने बताया कि जलकल अपने संसाधनों से रोजाना करीब 5 क्यूसेक (11.23 मिलियन लीटर पर डे) की सप्लाई कर रहा है. हालांकि गंगाजल परियोजना का 100 एमएलडी पेयजल भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई हो रहा है, किंतु योजना हैंडओवर न होने से अभी इसे आंकड़ों में शामिल नहीं किया जा सका है. जीएम का कहना है कि शहर में महज 21,700 उपभोक्ता ही पानी का बिल दे रहे हैं.