- सीएम के आदेश के बाद भी एलयू में छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर नहीं हो रही कोई तैयारी

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LUCKNOW : गोरखपुर और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की घोषणा होते ही एलयू के छात्र नेता भी चुनाव को लेकर मुखर हो गए हैं. वे अब प्रदेश सरकार और गवर्नर से मिलकर चुनाव कराने की पैरवी करेंगे.

सभी छात्र संघ चाहते चुनाव

छात्रसंघ चुनाव को लेकर एलयू में सक्रिय सभी छात्रसंघ सामने आ गए हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस मुद्दे पर एलयू को ज्ञापन भी सौंप चुका है. वहीं समाजवादी छात्रसभा अब इस मुद्दे को लेकर सीएम और राज्यपाल तक जाने की बात कर रही है. लेकिन यूनिवर्सिटी हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने की बात कह इसे टाल रहा है.

दो बड़ी यूनिवर्सिटी में अगले माह चुनाव

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में 13 सितंबर और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में चार अक्टूबर को छात्रसंघ चुनाव होना हैं. प्रदेश सरकार ने सभी यूनिवर्सिटी को नया सेशन शुरू होने के तीन माह के भीतर छात्रसंघ चुनाव कराने का आदेश दिया है. जिन यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव किसी कारण से रुका है, वहां के मामलों को जल्द निपटारा करके चुनाव कराने का आदेश दिया था. पर एलयू प्रशासन ने इसके बाद भी चुनाव की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

खास है एलयू का चुनाव

प्रदेश की राजधानी होने के कारण एलयू का चुनाव सभी राजनैतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन जाता है. यहां से निकले कई छात्र नेता राजनीति में अपनी विशेष पहचान बनाने में सफल हुए हैं. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा जैसी विभूतियां भी यहीं की रही हैं. वर्तमान के नेताओं को देखें तो सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल अंजान, सपा सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्री रहें अरविंद सिंह गोप, राजपाल कश्यप और मौजूदा सरकार में मंत्री ब्रजेश पाठक यहीं की छात्र राजनीति से आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं.

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13 साल से नहीं हुए चुनाव

एलयू में 13 साल से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं. जिससे राजनीति में पहचान बनाने की चाह रखने वाले छात्रनेता हताश हो रहे हैं. दबी जुबान ये स्वीकार करते हैं कि जब उनके पास पद ही नहीं होगा तो कोई भी पार्टी उन्हें आगे बढ़ाने को क्यों सोंचेगी. बिना पद के पार्टी के आलाकमान का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना किसी चुनौती से कम नहीं है.

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यहां छात्रसंघ चुनाव की कोई सुगबुगाहट नहीं है. यूनिवर्सिटी में लगातार लोकतंत्र की हत्या की जा रही है. जब राजनीति की नर्सरी से कोई नहीं निकलेगा तो नेतृत्वकर्ता कैसे बनेंगे.

- विवेक सिंह मोनू, छात्रनेता, एबीवीपी

अखिलेश सरकार में 80 प्रतिशत यूनिवर्सिटी और महाविद्यालय में चुनाव हुआ था. भाजपा ने भी चुनाव कराने का आदेश दिया लेकिन एलयू वीसी इस पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

- अनिल यादव मास्टर, छात्रनेता, समाजवादी छात्रसभा

यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव होना जरूरी है, इससे छात्रों का नेतृत्वकर्ता मिलते हैं, जो समय-समय पर छात्रों की हो रही समस्याओं में प्रशासन तक ले जाते है.

अनुराग तिवारी, छात्र नेता

यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ रही है. छात्रों पर सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली थोपी जा रही है जबकि तीन राज्यों में यह प्रणाली बंदी की कगार पर है. छात्रसंघ होता तो इसका विरोध होता.

अजित प्रताप सिंह, छात्र नेता