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कानपुर। स्‍मॉल कैमरा मार्केट को खत्म करने के बाद अब स्मार्टफोन मेकर्स ने 'एसएलआर' कैमरा सेगमेंट को चैलेंज करना शुरू कर दिया है। कई कैमरा और लेंस कंपनियां इस सेक्टर में उभर रही संभावनाओं को देखते हुए स्मार्टफोन कंपनियों के साथ गठजोड़ कर रही हैं। स्मार्टफोन मेकर्स भी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस'' और 'मल्टीकैमरा लेंस' जैसी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी द्वारा स्मार्टफोन से फोटो लेने वालों को तस्वीरों में 'एसएलआर' कैमरे जैसा आउटपुट देने की कोशिश कर रहे हैं।

3 और 4 कैमरा लेंस वाले स्‍मार्टफोन भी बाजार में उपलब्‍ध
एडवांस ड्यूल और ट्रिपल कैमरा फोन क्वालिटी के मामले में पुराने सिंगल रियर कैमरा से काफी आगे निकल गए हैं। आजकल के लेटेस्‍ट फोन कैमरा डेप्‍थ ऑफ फील्ड कंट्रोल करने, ऑप्टिकल जूम करने, बेहतर डेप्‍थ वाली डिटेल्ड इमेज क्लिक करने, बढिया ब्लैक एंड वाइट तस्वीरें लेने और ज्यादा वाइड व्यू वाली तस्वीरें लेने जैसी सुविधाओं से लैस हैं। जैसे 'हुआवे पी20' फोन 3 रियर कैमरों के साथ आता है, जिसमें 40 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा 'आरजीबी सेंसर' लगा है, इसमें 20 मेगापिक्सल का एक मोनोक्रोम सेंसर दिया गया है जो तस्वीर में डेप्‍थ बढ़ाता है। साथ ही इसमें 8 मेगापिक्सल का टेलीफोटो लेंस 3 एक्स ऑप्टिकल जूम के साथ दिया गया है। ये सभी कैमरा मिलकर 5 एक्स हाइब्रिड ज़ूम की सुविधा देते हैं।

परफेक्ट कैमरा स्मार्टफोन खरीदने से पहले जरूर पढ़ें ये स्‍मार्ट टिप्‍स

आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस ने मोबाइल फोटोग्राफी को बनाया आसान
आजकल ज्‍यादातर मोबाइल कंपनियां मल्टीकैमरा फोन बाजार में उतार रही हैं लेकिन 2 या इससे ज्यादा कैमरा होने से ही केवल बढिया फोटो नहीं मिलते। 'गूगल पिक्सल 2' फोन इसका बढिया उदाहरण है। सिंगल रियर कैमरा फोन होने के बावजूद यह कैमरा बेहतर रिजल्ट देता है। ऐसा शानदार फोटो आउटपुट इन स्‍मार्टफोन में मौजूद आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के कारण आता है। मल्टी कैमरा सेटअप अलग-अलग स्मार्टफोन मॉडल्स में अलग तरीके से काम करते है इसीलिए स्मार्टफोन चुनने से पहले फोन के स्‍पेसीफिकेशन और रिव्यु में इन बातों को ध्यान से पढ़ें..

बेस्‍ट कैमरा स्‍मार्टफोन खरीदने से पहले कैमरा तकनीक से जुड़े कुछ खास शब्‍दों के बारे में जरूर जान लीजिए, जो बेहद काम के हैं।।।

मैनुअल मोड : आजकल के लगभग सभी प्रीमियम और मीडियम लेवन स्‍मार्टफोन में तस्‍वीरें लेने के लिए मैनुअल मोड का ऑप्‍शन मौजूद होता है। ये ऑप्‍शन कुछ कुछ वैसे ही हैं, जैसे किसी डीएसएलआर कैमरे में होते हैं।

जूम रेंज:
ड्यूल और ट्रिपल कैमरा टेक्नोलॉजी की वजह से अब 2 एक्स, 3 एक्स ऑप्टिकल जूम का यूज किया जा सकता है। 'हुआवे पी20 प्रो' में 5 एक्स हाइब्रिड जूम मौजूद है। इनके द्वारा बेहतरीन अल्‍ट्रा वाइड शॉट भी लिए जा सकते हैं।

ऑटोफोकस:
कंट्रास्ट डिटेक्शन, फेस डिटेक्शन और ऑटो फोकस टेक्नोलॉजी के बाद लेजर बेस्ड फोकस टेक्नोलॉजी से कम रौशनी में भी सटीक ऑटोफोकस मिलता है। कम रौशनी में तस्वीरें लेकर फोन कैमरा के ऑटोफोकस की परख कर लें।

डिस्प्‍ले और कलर्स:
बहुत से फोन्स में तस्वीरों के रंग बहुत ज्यादा तेज (विविड) आते हैं। ऐसे फोन्स जो ओरिजनल रंगों के आस-पास रिजल्ट देते हैं, ज्यादा बेहतर होते हैं। एडिटिंग के वक्त रंग बढ़ाए भी जा सकते हैं।

मेगापिक्सल:
एक मेगापिक्‍सल एक मिलियन पिक्‍सल के बराबर माना जाता है। ज्यादा मेगापिक्सल के फोन से बड़े आकार की शानदार तस्वीरें ली जा सकती हैं। क्रॉपिंग करने के बाद भी इमेज रेजुलेशन काम लायक बना रहता है।

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ऑप्टिकल इमेज/वीडियो स्टेब्लाइजेशन:
फोन कैमरा में 'ओआईएस' की मैनुअल कंट्रोलिंग से कम रौशनी में ली गई तस्वीरों में शेक इफेक्‍ट से निपटा जा सकता है और वीडियो भी स्मूद आते हैं।

लेंस अपर्चर:
फास्ट अपर्चर कम रौशनी में भी बेहतर, चमकदार और कम नॉइज वाली तस्वीरें लेने में मददगार साबित होता है। हाल ही में अनाउंस हुए 'एलजी' के ट्रिपल कैमरा फोन 'एलजी वी 40', 'सैमसंग एस9 प्‍लस' का प्राइमरी कैमरा एफ/1.5 अपर्चर का है। मीडियम रेंज के फोन कैमरा में भी एफ/1.8 अपर्चर मिल जाएगा।

बोकेह इफेक्ट:
ड्यूल कैमरा फोन में सॉफ्टवेयर की मदद से 'बोकेह इफेक्ट' हासिल किया जा सकता है। किसी फोटो के मेन सब्जेक्‍ट को फोकस कर उसके बैकग्राउंड को हल्‍का ब्‍लर करने को बोकेह इफेक्ट के नाम से जाना जाता है। यह बहुत अट्रैक्टिव लगता है। कुछ सिंगल कैमरा फोन में भी बोकेह ऑप्‍शन होता है पर इनका इफेक्ट उतना बढिया नहीं आता।

लो-लाइट परफॉर्मेंस:
हम सभी अपनी बहुत सी तस्वीरें कम रौशनी में क्लिक करते है। अपने छोटे सेंसर साइज की वजह से स्मार्टफोन से रात में ली गई तस्वीरों की क्वालिटी हमेशा परेशानी वाली होती है। कम रौशनी की तस्वीरें अक्सर नॉइजी और डार्क आती हैं। अगर आप कम रोशनी में बेहतर तस्वीरें चाहते है तो फास्ट अपर्चर, बढिया सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी से लैस कम रौशनी में बेहतर रिजल्ट देने वाले फोन कैमरा का चुनाव करें।

पिक्सल और सेंसर साइज:
बड़े साइज का पिक्सल ज्यादा फोटॉन (लाइट) रिसीव करता है इसलिए पिक्चर में नॉइज कंट्रोल रहती है लेकिन कैमरा स्पेसिफिकेशंस में पिक्सल साइज का जिक्र नहीं होता। बड़े साइज के कैमरा सेंसर छोटे सेंसर से कहीं बेहतर आउटपुट देते हैं। स्मार्टफोन कैमरा सेंसर छोटे आकार के होते हैं। इसी कमी को ध्यान में रखते हुए मोबाइल कंपनियों ने ड्यूल, ट्रिपल कैमरा टेक्नोलॉजी को अपनाया है। अब कुछ एडवांस स्मार्टफोन 40 से ज्यादा मेगापिक्सल की तस्वीरें भी ले सकते हैं।

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