बसपा का वोट कम हुआ ट्रांसफर, लगातार दूसरी बार अखिलेश को गठबंधन से नुकसान

- मुलायम, आजम को मिली जीत तो डिंपल की करारी शिकस्त

- इटावा के किले को नहीं बचा सकी सपा, बाकी जगह भी बुरा हाल

LUCKNOW (23 May):

लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन होने के बाद नारा दिया गया था कि 'एक वोट घटने न पाए, एक वोट बंटने न पाए', चुनाव नतीजे आने के बाद यह अनुमान लगाना आसान है कि तमाम समझौते कर बसपा से गठबंधन करने वाली समाजवादी पार्टी को उम्मीद के मुताबिक बसपा कैडर के वोट हासिल नहीं हो सके। इसके विपरीत बसपा को सपा के वोट बैंक का भरपूर फायदा मिला और वह पिछले चुनाव में मिली जीरो सीट की जगह इस बार 10 सीटों पर अपनी जीत का परचम लहराने में कामयाब रही। निश्चित रूप से यह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के राजनीतिक कौशल की कमी ही माना जाएगा जो सूबे की बड़ी पार्टियों में शुमार इस दल को चुनाव में हाशिए पर ढकेलने की वजह बन गया।

नहीं बचा पाए तीनों सीट

सपा की हार का आलम यह रहा कि उपचुनाव में जीती अपनी तीनों सीटों पर भी वह अपना कब्जा बरकरार नहीं रख सकी। पिछले लोकसभा चुनाव में परिवार के सदस्यों की पांच सीटों पर ही जीत हासिल करने वाली सपा ने उपचुनाव में सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के प्रभाव वाली सीट फूलपुर और भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन से रिक्त हुई कैराना सीट पर जीत हासिल की थी। ये तीनों सीटें अब भाजपा के कब्जे में दोबारा आ चुकी है। सपा केवल आजमगढ़, मैनपुरी, रामपुर को मजबूती से जीत पाई है। इसमें से आजमगढ़ और मैनपुरी में पिछली बार मुलायम सिंह यादव चुनाव जीते थे। बाद में मैनपुरी सीट पर उपचुनाव में मुलायम के पौत्र तेजप्रताप ने जीत दर्ज करायी थी। इस बार सपा को तीन सीटों रामपुर, संभल और मुरादाबाद में खाता खोलने का मौका मिला है जो थोड़ी राहत की बात जरूर है पर अपने तीन सांसदों कन्नौज सीट पर डिंपल यादव, फिरोजाबाद सीट पर अक्षय यादव और बदायूं सीट पर धर्मेद्र यादव की हार से उसे गहरा झटका भी लगा है।

बसपा के दोनों हाथों में लड्डू

गठबंधन का नेतृत्व कर रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती को इस चुनाव में नौ सीटों पर कामयाबी मिली है जो उसके लिए सुखद संकेत है हालांकि मायावती का प्रधानमंत्री बनने का सपना इस बार भी पूरा नहीं हो सका। पिछले चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुल सका था जबकि विधानसभा चुनाव में भी उसे महज 19 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इसके बाद यह अनुमान लगाया जाने लगा था कि बसपा का बुरा दौर शुरू हो गया है और पार्टी को यूपी में अब पुनर्जीवित करने की उम्मीदें खत्म हो गयी है। हालांकि सपा से गठबंधन कर उसे नौ सीटों पर जीत हासिल हुई है। बसपा की ओर से सबसे शानदार प्रदर्शन गाजीपुर में अफजाल अहमद अंसारी ने केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को हराकर किया। पूर्वाचल में अंसारी बंधुओं और मनोज सिन्हा के बीच रार भी सबकी जुबां पर रहती है लिहाजा इस जीत के तमाम मायने भी निकाले जा सकते हैं। गाजीपुर के अलावा बसपा को अंबेडकरनगर, अमरोहा, घोसी, जौनपुर, लालगंज, नगीना, सहारनपुर, बिजनौर और श्रावस्ती में भी जीत हासिल हुई है। इन सारी सीटों पर बसपा ने भाजपा को शिकस्त दी है।

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कांग्रेस ने िबगाड़ा खेल

विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करने वाली कांग्रेस ने सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को लोकसभा चुनाव में गहरी चोट दी है। गठबंधन में शामिल न होकर और यूपी की तमाम सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारकर कांग्रेस ने गठबंधन को बड़ी जीत की ओर बढ़ने से रोक लिया जिससे उम्मीद के मुताबिक सीटों पर जीत हासिल नहीं हो सकी। इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को भी हुआ है और वह अमेठी को छोड़कर किसी भी जगह दूसरे स्थान पर भी नहीं आ सकी।

बसपा को इन सीटों पर मिली जीत

सीट बसपा प्रत्याशी जीता भाजपा प्रत्याशी हारा

अंबेडकरनगर रितेश पांडेय मुकुट बिहारी वर्मा

अमरोहा कुंवर दानिश अली कंवर सिंह तंवर

घोसी अतुल राय हरिनारायण राजभर

गाजीपुर अफजाल अंसारी मनोज सिन्हा

जौनपुर श्याम सिंह यादव केपी सिंह

लालगंज संगीता आजाद नीलम सोनकर

नगीना गिरीश चंद्र डॉ। यशवंत सिंह

सहारनपुर हाजी फजलुर्ररहमान राघव लखनपाल

श्रावस्ती राम शिरोमणि दद्दन मिश्रा

बिजनौर मलूक नागर राजा भारतेंद्र सिंह

सपा को इन सीटों पर मिली जीत

सीट सपा प्रत्याशी जीता भाजपा प्रत्याशी हारा

आजमगढ़ अखिलेश यादव दिनेश कुमार यादव निरहुआ

मैनपुरी मुलायम सिंह यादव प्रेम सिंह शाक्य

रामपुर मोहम्मद आजम खां जया प्रदा

मुरादाबाद टीके हसन कुंवर सर्वेश कुमार

संभल शफीकुर्ररहमान बर्क परमेश्वर लाल सैनी