-टूथपेस्ट से लेकर ब्रांडेड पाउडर, क्रीम सहित अन्य सामाना की हो रही इंडो-नेपाल सीमा से तस्करी

-नेपाली रेट पर माल खरीद इंडियन प्रिंट पर मार्केट में बेच रहे व्यापारी

-रोजाना दो करोड़ का कास्मेटिक सामाना पहुंचता है गोरखपुर बाजार में

GORAKHPUR: इंडो-नेपाल की खुली सीमा तस्करों को खूब भा रही है. सुरक्षा एजेंसियां व पुलिस सीमा पर कितनी भी सख्ती क्यों न कर दें, लेकिन अपने मजबूर नेटवर्क व सेटिंग-गेटिंग के बदौलत तस्कर अपने मकसद में कामयाब हो रहे हैं. इन दिनों कास्मेटिंग सामान की तस्करी काफी मुनाफे का काम मान तस्कर इससे गोरखपुर बाजार को पाटने में लगे हैं. इनमें शैम्पू, टूथ पेस्ट से लेकर क्रीम, साबुन, लिपिस्टिक व अन्य कास्मेटिंग सामान शामिल है. इसका खुलासा हुआ है दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की पड़ताल में. जब हमारी टीम पड़ताल करने निकली तो पता चला कि साहबगंज मंडी से लेकर शाहमारूफ, पांडेय हाता से लेकर विभिन्न एरिया में होलसेलर तस्करी के इन सामान को खरीदकर गांव-देहात के ग्राहकों में खपा रहे हैं.

होता है अध्िाक मुनाफा

जानकारों के मुताबिक, इन सामान में कुछ कास्मेटिक प्रॉडक्ट नकली भी हैं. जिन पर मेड इन चाइना लिखा होता है. वहीं, अधिकांश सामान असली और ब्रांडेड हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक व्यापारी ने बताया कि नेपाल के 48 रुपए के टूथपेस्ट के लिए भारतीय रुपए में 30 रुपए देना होता है. व्यापारी भारतीय रुपए के अनुसार, 30 रुपए देकर माल उठा लेते हैं और गोरखपुर के बाजार में 48 रुपए में बेच देते हैं. चूंकि सामान पर एमआरपी 48 रुपए लिखा होता है तो उपभोक्ता भी पूछताछ नहीं करते.

बेहद मुश्किल है पकड़

नेपाली सामान की पहचान करना बेहद मुश्किल है. यह सामान देखने में बिल्कुल उसी तरह है, जैसा इंडिया में है. फर्क सिर्फ इतना है कि इनकी पैकिंग के पीछे काफी ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि यह प्रॉडक्ट मेड इन नेपाल का है. हालांकि हिंदुस्तान लीवर से लेकर डाबर जैसी तमाम ऐसी ब्रांडेड कंपनियां हैं, जिन्होंने नेपाल में अपनी फैक्ट्री डाल रखी है. जिस पर मेन्यूफैक्चरिंग से लेकर कंपनी का पता भी नेपाल का है और यह प्रॉडक्ट सिर्फ नेपाल में ही बेचे जा सकते हैं. चूंकि नेपाल में इसकी एमआरपी बेहद कम है और भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत और भ्ाी कम है.

ऐसे पार करते हैं बार्डर

जानकारों के मुताबिक, तस्करी के इस कारोबार से शहर के कई सफेदपोश भी जुड़े हैं. इन्होंने इस काम के लिए सैकड़ों कैरियर को लगा रखा है. यह कैरियर भारत-नेपाल की खुली 182 किलोमीटर की सीमा का फायदा उठाते हुए पकडंडियों के रास्ते को चुनते हैं.

रास्ते में होती है सेटिंग

हालांकि इन सामान को बार्डर एरिया से गोरखपुर लाते वक्त भी आसानी से पकड़ा जा सकता है. बार्डर पर एसएसबी और कस्टम की आंखों में धूल झोंकर आने वाले इन सामान की भारत की सीमा में पड़ने वाले थाना क्षेत्रों में कोई चेकिंग नहीं होती है. सभी पुलिस पिकेट और पोस्ट पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को 100 की नोट देकर गाडि़यां बड़े आराम से पास हो जाती हैं.

केस-1

अक्तूबर में कस्टम डिपार्टमेंट ने रेलवे स्टेशन के पार्सल ऑफिस से तस्करी कर लुधियाना भेजे जा रहे करीब पांच लाख रुपए का टूथपेस्ट बरामद किया. इस मामले में टीम ने तस्कर को भी गिऱफ्तार किया था. इन टूथ पेस्टों में डाबर रेड पेस्ट, पेप्सोडेंट जैसी ब्रांडेड कंपनियों के टूथपेस्ट शामिल थे.

केस-2

जुलाई में कस्टम डिपार्टमेंट ने सोनौली के रास्ते आ रहे एक ट्रक को पकड़ा था. इसमें टीम ने तस्करी कर आ रहे टूथपेस्ट सहित विभिन्न तरह के ब्रांडेड कास्मेटिक क्रीम आदि भी बरामद किए थे. इस मामले में भी टीम ने तस्कर को गिरफ्तार ि1कया था.

केस-3

जनवरी में भी कस्टम डिपार्टमेंट ने सोनौली रोड पर एक मैजिक से तस्करी कर आ रहे कास्मेटिक सामान बरामद किए थे. इस तरह इस साल 2017 में अब तक कस्टम ने करीब 50 लाख रुपए से अधिक के तस्करी के माल बरामद ि1कए हैं.

प्वाइंट टू बी नोटेड

-सोनौली से गोरखपुर के रूट पर पड़ते हैं 10 पुलिस थाना और दर्जनों चौकियां

-प्रति बार्डर से रोजाना भारत की सीमा में भेजा जाता है करीब दो करोड़ का सामान

-भारत-नेपाल के बीच 182 किलोमीटर की खुली सीमा से चल रहा तस्करी का खेल

-सोनौली से लेकर ठूठीबारी, रक्सौल, झुलनीपुर बार्डर से आता है तस्करी का माल

-गोरखपुर में तस्करी का माल इक्ठ्ठा कर होती है देशभर में सप्लाई

-शहर के साहबगंज मंडी से लेकर शाहमारूफ और पांडेयहाता में बिकता है नेपाली प्रॉडक्ट

इन सामान की तस्करी

ब्रांडेड टूथपेस्ट

क्रीम, पाउडर

लिपिस्टिक

लेडीज अंडर गारमेंट्स

चाइनीज खिलौने

लाइट, हैंड वाच आदि

इन रास्ते से आते हैं तस्करी के सामान

सौनौली, ठूठीबारी, झुलनीपुर और रक्सौल के रास्ते भारत में भेजे जा रहे हैं. तस्करी के सामान की बड़ी खेप गोरखपुर की मार्केट सहित लखनऊ, दिल्ली, मुबंई, गुवाहटी, और आसपास के इलाकों में खपाई जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, सभी बार्डर से मिलाकर रोजाना करीब 8 से 10 करोड़ का तस्करी का माल भारत की सीमा में भेजा जा रहा है.

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वर्जन-- एसएसबी और आईजी