क्या है ‘द एज ऑफ पावर’ में
मुंबई से फोन पर आई नेक्स्ट से बात करते हुए तुहिन ने बताया कि यह नॉवेल इससे पहले उनकी लिखी ‘द एज ऑफ डिजायर’ से कैसे अलग है. यह भी जाना कि उन्हें अपने नॉवेल की सिक्वल लिखने में कितना मजा आया. और हां, उन्होंने अबतक के सफर के बारे में भी डिटेल से बताया. तुहिन ने बताया कि उनके लिखे नए नॉवेल द एज ऑफ पावर में काला धन और क्राइम अगेंस्ट वीमेन के बारे में लिखा गया है. उनका कहना था कि कंट्री में पिछले कुछ सालों से जिस तरह का माहौल रहा है उसमें क्राइम अगेंस्ट वीमेन और काला धन बड़ा मुद्दा रहा है. यह 2012 में पŽिलश हुई उनकी नॉवेल ‘द एज ऑफ डिजायर’ की सिक्वल है. दो साल पहले की इस नॉवेल के बारे में उन्होंने बताया कि यह 1998-99 के दौरान बिहार में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर लिखी गई थी. इसमें काल्पनिक आईएएस की वाइफ का गैंग रेप हो जाता है. वह न्याय के लिए भटकती रहती है, लेकिन कहीं न्याय नहीं मिलता. फिर उसे अपॉजिशन के एक लीडर का सहारा मिला. उस लीडर ने उस महिला से इलेक्शन लडऩे और अपने साथ हुई घटना को इलेक्शन में मुद्दा बनाने को कहा. वह महिला तैयार हो गई, इलेक्शन जीत गई. इसके बाद उन दोनों का जलवा दिल्ली में भी दिखता है और पूरे देश में पॉलिटिक्स की शक्ल ही बदल जाती है. उसी कहानी को आगे बढ़ाते हुए द एज ऑफ पावर लिखा गया है, जिसमें काले धन का पावर और क्राइम अगेंस्ट वीमेन को सेंटर में रखा गया है.

चाहत थी तुहिन की एक्टर बनने की
वर्ष 1995 में 12वीं और हिंदू कॉलेज से बीकॉम करने के बाद गुड लुकिंग तुहिन ने एक्टर बनने की ठानी और 2000 के अंत में पहुंच गए मुंबई. कहीं से एक्टिंग या दूसरे कोर्सेज नहीं करने की वजह से उन्हें ब्रेक नहीं मिला. उसके बाद उनके बचपन के इंटरेस्ट ने उनका साथ दिया. वे स्कूलिंग के दिनों से ही राइटिंग कॉम्पटीशन में पार्टिसिपेट करते थे. इसमें उन्हें कई प्राइजेज भी मिल चुके थे. फाइनली उन्होंने स्क्रिप्ट राइटिंग शुरू की. कई टीवी सीरियल्स के लिए उन्होंने स्क्रिप्ट राइटिंग की. कुछ फिल्मों के लिए भी उन्होंने काम किया, हालांकि वह फ्लोर पर नहीं आ पाईं. डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के लगातार इंटरफेयर करने की वजह से उन्हें अपने काम में फ्रीडम नहीं मिल पा रही थी. कुछ साल स्ट्रगल करने के बाद उन्होंने नॉवेल लिखने की ठानी और 2006 में उनकी पहली नॉवेल ‘दैट थिंग कॉल्ड लव’ पŽिलश हुई. उसके बाद उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा.

'मेरे कॅरियर के ग्रोथ में जमशेदपुर का बड़ा रोल है. इस सिटी की खासियत है कि छोटा होने पर भी यहां रिसोर्सेज की कमी नहीं. शांत और खूबसूरत तो है ही. अफसोस इस बात का है कि डेढ़-दो साल में एक ही बार जमशेदपुर आ पाता हूं. इच्छा है जमशेदपुर में लिटरेरी फेस्टिवल ऑर्गेनाइज करने की.'
- तुहिन सिन्हा, ऑथर

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