- जघन्य अपराधों की विवेचना की ऑनलाइन मॉनिटरिंग का बना था सॉफ्टवेयर

- हीनियस क्राइम मॉनिटरिंग सिस्टम से मातहतों की कार्यशैली पर रहती थी नजर

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LUCKNOW : उन्नाव में गैंगरेप कांड का वीडियो वायरल समेत पूरे प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों ने डीजीपी मुख्यालय के अफसरों की नींद उड़ा दी है. तमाम कवायदों के बाद भी खासतौर पर रेप के मामलों में अंकुश न लग पाना अफसरों के लिए मुश्किल का सबब बनता जा रहा है. इसकी वजह भी साफ है, लंबे समय से डीजीपी मुख्यालय स्तर से महिलाओं के साथ होने वाले अपराध की रोकथाम को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा सकी है. डीजीपी मुख्यालय अपने उस खास सॉफ्टवेयर को भी भूल चुका है जिसकी बदौलत जघन्य अपराधों की विवेचना की मॉनिटरिंग की जाती थी.

महिला अपराधों में बेहद कारगर

सपा सरकार की शुरुआत में जघन्य अपराधों की मॉनिटरिंग के लिए आईजी स्थापना संदीप सालुंके ने हीनियस क्राइम मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया था. इसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता था कि किस अपराध में विवेचना की क्या स्थिति है. कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया, कितने पर्चे काटे जा चुके हैं, कितने वांछित हैं, कितने लोगों के बयान दर्ज हुए, चार्जशीट की स्थिति क्या है इत्यादि. खासकर महिला अपराधों के मामले में यह बेहद कारगर साबित हो रहा था क्योंकि इसके जरिए आलाधिकारी एक-एक मामले की रोजाना लगने वाली पुलिस रिपोर्ट से वाफिक हो रहे थे. यह सॉफ्टवेयर डीजीपी मुख्यालय के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय तक देखा जा सकता था. संदीप सालुंके के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के साथ ही यह सॉफ्टवेयर भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और परंपरागत तरीके से मैनुअल रिपोर्ट मंगाई जाने लगी. हाल ही में महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं ने डीजीपी मुख्यालय के अधिकारियों को इस बारे में सोचने को मजबूर कर दिया है और इस सॉफ्टवेयर को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.

क्या था सॉफ्टवेयर में

- किस अपराध में विवेचना की क्या स्थिति है

- कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया

- कितने पर्चे काटे जा चुके हैं

- कितने अपराधी वांछित हैं

- कितने लोगों के बयान दर्ज हुए

- चार्जशीट की स्थिति क्या है