- सोलर पैनल सिस्टम की रखी गई आधारशिला, एक मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन

- सस्ते रेट में यूनिवर्सिटी को मिलेगी बिजली, करीब 15 लाख रुपए सालाना होगा बचत

GORAKHPUR: डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी अब सूरज की रोशनी पर जगमगाएगा. इसे लिए यूनिवर्सिटी ने पहल शुरू कर दी है. बुधवार को वीसी प्रो. वीके सिंह ने कैंपस में सोलर एनर्जी के तहत शुरू होने वाले इस पहले प्रोजेक्ट का विधिवत शुभारंभ किया. इस प्रोजेक्ट में आधारभूत ढांचे का काम 90 दिनों के अंदर पूरा हो जाएगा और उसके बाद यूनिवर्सिटी की व्यवस्था सोलर एनर्जी से जगमगाएगी. इस मौके पर ऑर्गनाइज प्रोग्राम में वीसी ने कहा कि दुनिया भर में ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में काम हो रहा है. केंद्र और प्रदेश सरकार भी इस दिशा में निरंतर कोशिश कर रही है. इसमें कदम से कदम मिलाते हुए आज यूनिवर्सिटी ने भी इस दिशा में मजबूत पहल कर दी है.

पॉवर ग्रिड को भी देगा एनर्जी

वीसी प्रो. वीके सिंह ने बताया कि इस पहल के बाद कैंपस न सिर्फ पॉवर सप्लाई में आत्मनिर्भरता हासिल कर लेगा बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा को नेशनल पॉवर ग्रिड को भी दे सकेगा. उन्होंने बताया कि अभी यूनिवर्सिटी सात रुपए प्रति यूनिट की दर से पॉवर सप्लाई हासिल कर रहा है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद यह लागत घटकर तीन रुपए प्रति यूनिट हो जाएगी. सबसे अहम बात यह है कि ये दरें अगले बीस सालों तक चेंज नहीं होंगी, जिससे यूनिवर्सिटी को फाइनेंशियल फायदा होगा.

सेकेंड फ्लोर पर स्थापना

प्रोजेक्ट के बारे में जानकरी देते हुए यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार शत्रोहन वैश्य ने बताया कि एक मेगा वाट क्षमता वाले इस सौर ऊर्जा प्लांट की स्थापना एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग के सेकेंड फ्लोर पर की जा रही है. जिसे मेसर्स क्लीन मैक्स इनवायरो एनर्जी सॉल्युशंस प्राइवेट लिमिटेड की ओर से लगाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि आने वाले 3 माह में 320 वाट क्षमता के 3100 सोलर पैनल लगा लिए जाएंगे, जिससे 1000 किलोवाट की ऊर्जा आपूर्ति होगी. उन्होंने बताया कि अभी 1200 किलोवाट बिजली की जरूरत पड़ती है, इसका बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से हासिल करने के यूनिवर्सिटी को कुछ मदद मिलेगी.

30 लाख दिया जाता है बिल

गोरखपुर यूनिवर्सिटी कैंपस के साथ ही एडी बिल्डिंग और एजुकेशन फैकेल्टी में बिजली इस्तेमाल की जाती है. हॉस्टल में भी जमकर बिजली इस्तेमाल होती है. वहीं कई डिपार्टमेंट में एयर कंडीशन लगे हुए हैं, तो वहीं डिजिटल क्लास रूम्स और दूसरी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए यूनिवर्सिटी हर माह बिजली विभाग को करीब 30 लाख रुपए अदा करती है. यहां चौबीस घंटे बिजली सप्लाई की जाती है, इसलिए बिल भी खूब आता है. नई व्यवस्था से यूनिवर्सिटी को काफी फायदा होगा.