-सहायक स्टाम्प आयुक्त के मांगने पर भी दस्तावेज पेश नहीं कर पा रहे नगर निगम के अफसर

BAREILLY:

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए खरीदी गई नई जमीन को लेकर नगर निगम के अफसर घिरते नजर आ रहे हैं. सहायक आयुक्त स्टाम्प द्वारा स्टाम्प शुल्क की संभावित 'चोरी' के लेटर के बाद गरम हुए इस मुद्दे में अब सारी बात शासन के दस्तावेजों पर आकर टिक गई है. नगर निगम के अफसर अब तक इस मामले पर कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके हैं. मीडिया से संबंधित मामले पर बोलने से इनकार कर रहे हैं. चूंकि सरकारी उपयोग के लिए जमीन खरीदने के लिए स्टाम्प शुल्क से राहत ली जा रही है. ऐसे में कई अहम दस्तावेज होने जरूरी थे. दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो हडकंप मच गया. आखिर क्यों नहीं मिल पा रहे साक्ष्य और क्या है संभावित खेल, पढि़ए..

क्यों नहीं जारी हो सकता पत्र

इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के पास रजऊ परसपुर स्थित सॉलिड वेस्ट प्लांट लगाने के लिए वर्ष 2005 में भारत सरकार ने 13.86 करोड़ रुपए का बजट दिया था. वजह थी, कूड़ा कचरे पर मंडराते पक्षियों से बर्ड हिट का खतरा त्रिशूल एयरबेस के लड़ाकू विमान को प्रशिक्षण के दौरान था. 31 मार्च 2013 को प्लांट का संचालन शुरू हुआ. इंवर्टिस यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा हाईकोर्ट में दायर केस हारने के बाद नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने लीचेट प्लांट, 8 सौ पेड़ और दो पक्के नालों का निर्माण कराकर प्लांट संचालन का आदेश दिया. लेकिन नगर निगम ने शर्त पूरी नहीं की. फरवरी 2018 में एनजीटी में सुनवाई के दौरान जस्टिस ने नई जगह के प्रपोजल को दरकिनार कर पुराने प्लांट के संचालन पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांग ली है. संभावना है कि कोर्ट में मामला होने से प्लांट के लिए जमीन खरीदने पर शासन राजी नहीं होगा.

दस्तावेज पेश करने की तारीख नहीं

सहायक आयुक्त स्टाम्प ने नगर निगम को पत्र जारी करके दस्तावेज जमा करने को कहा है, लेकिन पत्र में दस्तावेज जमा करने के लिए अंतिम तारीख निर्धारित नहीं की गई है. संभावना जताई जा रही है कि नगर निगम के अफसर दस्तावेज देने की आखिरी तारीख न होने से लंबा समय तक मामला पेंडिंग रख सकते हैं. हालांकि, सहायक स्टाम्प आयुक्त 15 दिन बाद फिर से रिमाइंडर भेजकर 15 दिन का और समय देने की बात कह रहे हैं. जिसके बाद उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने की बात कही है.

क्लीनिंग प्रस्ताव में खेल का आरोप

मार्च में संपन्न हुई बोर्ड बैठक में रजऊ परसपुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की जमीन पर पोस्ट क्लोजर रिपोर्ट लगाने की कार्रवाई का प्रस्ताव शामिल था. प्रस्ताव था कि प्लांट की जमीन को क्लीन कर यानि जैसी जमीन पहले थी वैसी ही बनाने का प्रस्ताव था. बोर्ड की मुहर लगी. जिस पर विपक्ष ने खेल करने के आरोप लगाए हैं.

पुराना सॉलिड वेस्ट प्लांट, एक नजर में

- 2005 में भारत सरकार ने दिया बजट

- 13.86 करोड़ के बजट से निर्माण शुरू

- 2008 में निर्माण कार्य हुआ पूरा

- 2008 में एकेसी डेवलपर्स से करार

- 2013, मार्च में एनजीटी ने दी संचालन की मंजूरी

- 2013, 30 मार्च को हुआ था प्लांट का ट्रायल

- 2013, 31 मार्च को इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी सड़क पर, हालांकि संचालन शुरू

- 2013, 31 मार्च को इंवर्टिस यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट में दायर की पीआईएल

- 2013, 18 जुलाई को एनजीटी द्वारा शर्त पूरी न होने पर प्लांट स्थानांतरण का आदेश

- 2013 अक्टूबर में नगर निगम हाईकोर्ट में हारा केस, पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

- 2013 अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने भी शर्त पर प्लांट संचालन का दिया आदेश

- 2013 अक्टूबर से 2014 जनवरी तक प्लांट चला, शर्त पूरी न होने पर फिर बंद

- 2014 फरवरी से बंद प्लांट के संचालन को सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है केस

- 2018, 30 मार्च नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट से केस वापसी का दिया एफिडेविट

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नई जमीन पर कब क्या ?

- 110 बीघा जमीन फरीदपुर के बहुगुलपुर में खरीदी

- 23 भूमि स्वामियों से नगर निगम ने खरीदी है जमीन

- 1.70 करोड़ की खरीदी जमीन, स्टाम्प शुल्क में ली छूट

- 13 अक्टूबर 2017 को राज्य सरकार के पक्ष में रजिस्ट्रेशन

- 18 अप्रैल 2018 को सहायक स्टाम्प आयुक्त की आपत्ति

- 4 दिन पूरे, अफसर नहीं दे सके नोटिफिकेशन, ऑथराइजेशन प्रपत्र

स्टाम्प शुल्क से ली गई छूट के दस्तावेज जमा करने के लिए नगर निगम को लिखा है. 15 दिन या 1 माह बाद फिर से रिमाइंडर भेजा जाएगा. इसके बाद भी स्टाम्प शुल्क और दस्तावेज न देने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी.

ओम प्रकाश सिंह, सहायक स्टाम्प आयुक्त

मुझे अभी तक सहायक स्टाम्प आयुक्त का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है. पत्र मिलते ही जो जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं वह नगर निगम द्वारा सबमिट कर दिए जाएंगे.

राजेश कुमार श्रीवास्तव, नगर आयुक्त

मुझे पत्र प्राप्त नहंीं हुआ है. जो भी दस्तावेज मांगे गए हैं वह हैं या नहीं मुझे नहीं पता. यदि नहीं होंगे तो जो नियमानुसार स्टाम्प शुल्क बनेगा वह दे दिया जाएगा.

डॉ. उमेश गौतम, मेयर

बहुगुलपुर में खरीदी गई जमीन के मामले के बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता है. मैं आउट ऑफ स्टेशन हूं, वापस आकर बात करूंगा.

आरके सोनकर, मुख्य कर अधीक्षक