एमडीए की ऑनलाइन नक्शा एप्रूवल प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की पहल

औद्योगिक एवं हाई रिस्क नक्शों के प्रकरणों पर होगी सुनवाई

Meerut. ऑनलाइन नक्शा एप्रूवल प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और शिकायतों के निस्तारण के उद्देश्य से एमडीए समाधान दिवस कैंप के आयोजन की शुरुआत कर रहा है. इस समाधान दिवस के माध्यम से लंबित मानचित्रों व मानचित्रों से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान मौके पर ही कराकर लोगों को राहत देने की शुरुआत की गई थी. माह के प्रथम व चतुर्थ शनिवार को समाधान दिवस का आयोजन किया जाएगा.

हाईरिस्क का समाधान

मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष साहब सिंह के निर्देश पर गठित अधिकारियों का पैनल समाधान दिवस के दौरान आ रही शिकायतों का निस्तारण करेगा. खासकर औद्योगिक और हाईरिस्क के नक्शों के परीक्षण के लिए समाधान दिवस का आयोजन किया जा रहा है. आमतौर पर देखा गया है कि जरूरी दस्तावेजों को पूरा न करने पर हाईरिस्क और औद्योगिक के नक्शों में प्राधिकरण की ओर से आपत्ति लगाई जाती है. गौरतलब है कि ऑनलाइन नक्शा एप्रूवल प्रक्रिया के आरंभ होने के बाद सामान्य नक्शों को एप्रूवल देने की प्रक्रिया को 48 घंटे में पूर्ण करने के निर्देश शासन स्तर से दिए गए हैं.

एक नजर में..

1024-एमडीए के ऑनलाइन पोर्टल पर आए नक्शे

697-नक्शों को मिला एप्रूवल

207-नक्शे हुए रिजेक्ट

120-नक्शों को एप्रूवल प्रोसेस में

(नवंबर 2017 से लेकर अब तक)

नंबर तीन पर मेरठ

ऑनलाइन नक्शा एप्रूवल की प्रक्रिया में मेरठ विकास प्राधिकरण तीसरे नंबर पर है. प्रथम नंबर पर आगरा है, यहां पिछली 5 वर्षो से ऑनलाइन नक्शा एप्रूवल की प्रक्रिया संचालित हो रही है. दूसरे नंबर पर लखनऊ विकास प्राधिकरण है. बता दें कि शासन के निर्देश के बाद नवंबर 2017 के बाद ऑनलाइन नक्शा एप्रूवल प्रक्रिया प्राधिकरणों में आरंभ कर दी गई है.

48 घंटे में नक्शा पास

नियोजन विभाग के एटीपी गोर्की कौशिक ने बताया कि शासन द्वारा संचालित निवेश मित्र पोर्टल पर महज 48 घंटे में इंडस्ट्री का नक्शा पास करने का कीर्तिमान एमडीए ने ही स्थापित किया है. प्रदेश के किसी भी अन्य प्राधिकरण ने पोर्टल पर इंडस्ट्री का नक्शा इससे कम समय में पास नहीं किया है.

एमडीए में सेमी कोर्ट फेल

एमडीए वीसी साहब सिंह के निर्देश के बाद पर प्राधिकरण में शुरू की गई सेमी कोर्ट व्यवस्था ठप हो गई है. अब फरियादी फिर एक टेबिल से दूसरी टेबिल पर चक्कर काट रहे हैं. कम्पाउंडिंग, रेरा समेत विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई के लिए गत दिनों प्राधिकरण में जोनल प्रभारी स्तर पर सेमी कोर्ट आरंभ की गई थी.

ये है मामला

प्राधिकरणों की गतिविधियों पर शासन स्तर से मॉनीटरिंग शुरू हो गई तो प्राधिकरण उपाध्यक्षों ने अधीनस्थों के पेंच कसने शुरू कर दिए. अधिकारियों को कम्पाउंडिंग के केसेज की सुनवाई के लिए कार्यालय में ही सेमी कोर्ट की स्थापना के निर्देश दिए गए. शुरुआत में कुछ असर हुआ, लेकिन अब आलम यह है कि एमडीए अधिकारियों ने सेमी कोर्ट बंद कर दी है. लिहाजा फरियादी शिकायत लेकर फिर एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस चक्कर काटने लगे. ऐसे में एमडीए वीसी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पूर्व घोषित प्रक्रिया के तहत सेमी कोर्ट में शिकायतों का निस्तारण करें.

देखने में आ रहा है कि प्राधिकरण के अधिकारी और जोनल प्रभारी शिकायतों और कम्पाउंडिंग के केसेज के निस्तारण के लिए गठित सेमी कोर्ट का संचालन सुचारु नहीं कर रहे हैं. ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जोनल प्रभारी यदि लापरवाही करेंगे तो उनसे जोन की जिम्मेदारी लेने का काम किया जाएगा.

साहब सिंह, उपाध्यक्ष, एमडीए

अब नहीं होगी रेरा की सुनवाई

लखनऊ में रीयल एस्टेट रेगुलेरिटी आथॉरिटी (रेरा) कोर्ट के गठन के बाद प्राधिकरण स्तर पर रेरा के प्रकरणों की सुनवाई नहीं होगी. प्राधिकरण के सचिव राजकुमार ने बताया कि अब मुख्यालय स्तर पर ही बिल्डर्स के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई होगी. गौरतलब है कि पूर्व में बिल्डर के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के निस्तारण के लिए हर प्राधिकरण में रेरा की सेमी कोर्ट की स्थापना की गई है. प्राधिकरण उपाध्यक्ष इन प्रकरणों की सुनवाई कर रहे थे. एमडीए उपाध्यक्ष आगरा विकास प्राधिकरण से जुड़े केसेज की सुनवाई कर रहे थे जबकि एमडीए के शिकायतकर्ता एडीए उपाध्यक्ष के समक्ष अपनी फरियाद लेकर जा रहे थे.