MEERUT जिला अस्पताल में गोद में अपने बीमार पिता को लेकर एक बेटा दिनभर दौड़ता रहा मगर यहां मौजूद डॉक्टर्स का दिल नहीं पसीजा। यही नहीं अस्पताल प्रशासन ने डीएम के लेटर का भी लिहाज नहीं किया। दोपहर बाद मीडिया में मामला पहुंचने के बाद इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर्स ने आनन-फानन में मरीज का इलाज किया।

ये है मामला
तारापुरी निवासी यासीन ने बताया कि उसके पिता जलील गले व सीने की बीमारी से पीडि़त हैं। सुबह से जिला अस्पताल में डॉक्टर्स के चक्कर काट रहा था लेकिन इलाज तो दूर स्ट्रेचर या व्हील चेयर तक नहीं मिल पाया। मजबूरी में वह गोद में लेकर ही पिता को यहां-वहां भटकता रहा। इससे पहले भी 12 मई को वह अपने पिता को लेकर जिला अस्पताल आया था लेकिन तब भी डॉक्टर्स ने उन्हें मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया था।

डीएम के लेटर के बाद अनदेखी
यासीन ने बताया कि इलाज के लिए उनके पास डीएम से स्वीकृत लेटर भी था लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसका भी लिहाज नहीं किया। यासीन ने बताया कि इससे पहले मेडिकल कॉलेज में भी इलाज के नाम पर उनके साथ धोखा हुआ। 1700 रूपये के इंजेक्शन लगाकर पिता को डिस्चार्ज कर दिया गया। मगर जब परिजनों ने मरीज के हालात जस के तस होने पर विरोध तो डॉक्टर्स ने मशीन खराब होने की बात कह दी। इसके बाद ही वह डीएम से स्वीकृत पत्र लेकर यहां आएं थे लेकिन डॉक्टर्स ने उसका भी लिहाज नहीं किया। दोपहर करीब 1 बजे जब मीडिया में मामला पहुंचा, तब जाकर डॉक्टर्स ने इलाज करना शुरू किया।

किसी भी मरीज के साथ ऐसा व्यवहार किया जाना दुभा‌र्ग्यपूर्ण हैं। अगर ऐसा कोई मामला हुआ है तो उसकी जांच करवाई जाएगी।

डॉ। पीके बंसल, एसआईसी, जिला अस्पताल