बसपा और सपा के गठबंधन का ऐलान, बराबर सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

- यूपी की राजनीति में फिर रचा इतिहास, एक मंच पर आए मायावती और अखिलेश

- मायावती को पीएम बनाने पर बोले अखिलेश, यूपी से बने पीएम तो होगी खुशी

- कार्यकर्ताओं को दिया संदेश, मायावती का अपमान मेरा अपमान माना जाएगा

एक नजर में गठबंधन

38 सीटों पर लड़ेगी बहुजन समाज पार्टी

38 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी सपा

02 सीटें गठबंधन में आने वाले अन्य दलों को

02 सीटें अमेठी और रायबरेली में कोई प्रत्याशी नहीं

कोट

आज बसपा और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों की यह संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस दोनों गुरु-चेला नरेंद्र मोदी और अमित शाह की नींद उड़ाने वाली है. देश और जनहित में मैंने स्टेट गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर यह गठबंधन करने का फैसला लिया है. यह चुनावी गठबंधन 2019 की एक नई राजनीतिक क्रांति मानी जाएगी. यह बीजेपी के अहंकार का अंत साबित होगा.

मायावती, बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष

मेरे मन में गठबंधन की नींव तब पड़ी जब बीजेपी के नेताओं ने मायावती पर अशोभनीय टिप्पणियां की. इसके इनाम में बीजेपी ने उन्हें बड़े मंत्रालय सौंपे. राज्यसभा चुनाव में सपा-बसपा के संयुक्त प्रत्याशी को हराकर खुशियां मनाई. ध्यान रहे कि मायावती का अपमान मेरा अपमान है. सपा को बराबर सीटें देकर उन्होंने हमें बराबर का सम्मान दिया है.

अखिलेश यादव, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

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LUCKNOW: चुनावी दौर में यूं तो तमाम राजनैतिक दलों के बीच गठबंधन होता रहता है पर अगर ऐसे दो दल आपस में गठबंधन की बुनियाद रखें जिसकी ढाई दशक पुरानी दुश्मनी को देखकर किसी ने इसकी कल्पना भी न की हो तो मामला कुछ रोचक हो जाता है. कुछ ऐसा ही नजारा आगामी लोकसभा चुनाव से पहले यूपी में देखने को मिला जब बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को राजधानी के होटल ताजमहल में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया. मायावती ने कहा कि गठबंधन में बसपा और सपा 38-38 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेंगे. दो सीटें बाकी दलों के लिए छोड़ी गयी हैं तो रायबरेली और अमेठी में गठबंधन का कोई प्रत्याशी नहीं उतारा जाएगा ताकि भाजपा कांग्रेस को इन दो सीटों पर फंसा कर न रख सके.

यूपी से ही बने देश का पीएम

प्रेस कांफ्रेंस में एक सवाल ऐसा भी उठा जिसे लेकर भाजपा अक्सर महागठबंधन के अस्तित्व पर निशाना साधती रही है. इस सवाल ने अखिलेश को भी थोड़ा असहज किया. अखिलेश से यह पूछे जाने पर कि क्या आप मायावती को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानते हैं, उन्होंने थोड़ा संभलते हुए कहा कि आपको पता है कि मैं किसका समर्थन करूंगा. यूपी ने कई बार देश को प्रधानमंत्री दिया है. मुझे खुशी होगी अगर फिर से यूपी से ही पीएम चुना जाए. वहीं मायावती ने कहा कि चुनाव के बाद इसका फैसला हो जाएगा. इससे पहले अखिलेश ने कहा कि मैंने बोला था कि भाजपा के अहंकार को खत्म करने के लिए मैं कुछ कदम पीछे हटने को भी तैयार हूं. मायावती को धन्यवाद देते हुए बोले कि आपने बराबर सीटें देकर सपा का सम्मान बढ़ाया है. मीडिया के जरिए कार्यकर्ताओं को यह संदेश भी दिया कि मायावती का सम्मान मेरा सम्मान है और अगर भाजपा का कोई नेता मायावती का अपमान करता है तो उसे मेरा अपमान माना जाए. भाजपा इस गठबंधन से डरकर तमाम साजिशें करेगी. दंगा-फसाद भी करा सकती है. कार्यकर्ता इसका खास ध्यान रखें कि हमें संयम और धैर्य से काम लेना है. बसपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आपसी भाईचारे को मजबूत बनाना है.

सीटों के बंटवारे के बाद आया नाम

मायावती ने खुलासा किया कि सीटों का बंटवारा बीती चार जनवरी को दिल्ली में सपा अध्यक्ष अखिलेश के साथ हुई बैठक में ही हो गया था. इसके बाद बीजेपी ने साजिश के तहत सपा अध्यक्ष अखिलेश का नाम खनन घोटाले में उछालकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की. बसपा इसकी पुरजोर निंदा करने के साथ सपा के साथ मजबूती से खड़ी है. वहीं सीटों के बंटवारे को लेकर कहा कि जल्द ही किस सीट से कौन चुनाव लड़ेगा, इसकी जानकारी आप लोगों को मिल जाएगी. वहीं वह खुद किस सीट से चुनाव लड़ेंगी, इस सवाल को उन्होंने टाल दिया. साफ किया कि सपा के साथ उनका गठबंधन स्थायी है और यह यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा. यह ऐलान भी किया कि बसपा अन्य राज्यों में किसी ऐसी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी जो अपने वोट ट्रांसफर न करने के बजाय बसपा के वोट बैंक हासिल कर ले.

शिवपाल पर पैसा खर्च करना बेकार

मायावती ने सपा से अलग हुए शिवपाल सिंह यादव का नाम लेकर कहा कि उन पर बीजेपी द्वारा अधाधुंध पानी की तरह पैसा खर्च करना बेकार चला जाएगा. मुलायम का नाम लेकर बोलीं कि 1993 में कांशीराम के साथ मुलायम सिंह ने भी गठबंधन किया था जिसने बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंका था. इस गठबंधन में यूपी में हवा का रुख बदल दिया था. इसी वजह से मैंने विगत 2 जून 1995 को हुआ गेस्ट हाउस कांड भुलाकर देश और जनहित को ध्यान में रखते हुए गठबंधन करने का फैसला लिया है.

अखिलेश नहीं, मायावती की नजरों में कांग्रेस भ्रष्ट

प्रेस कांफ्रेंस की शुरुआत करने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा को जमकर खरी-खोटी सुनाने के साथ कांगे्रस को भी नहीं बख्शा. मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने आजादी के बाद कई वर्षो तक केंद्र और प्रदेशों में एकछत्र राज्य किया पर गरीबी, बेरोजगारी दूर नहीं कर सकी. इसके विपरीत भ्रष्टाचार में आकंठ डूब गयी. वहीं जब अखिलेश से यह पूछा गया कि आप कांग्रेस को भ्रष्ट मानते हैं कि नहीं, उन्होंने चुप्पी साधकर राजनैतिक कुशलता दिखाई.

फैक्ट फाइल

- 1993 में बसपा और सपा का हुआ था गठबंधन

- 26 साल बाद दोनों पार्टियों के बीच हुआ गठबंधन

- 02 सीटों फूलपुर और गोरखपुर में जीत का असर

- 02 जून 1995 का स्टेट गेस्ट हाउस कांड भूली मायावती